Feb 12, 2009

भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में भी होगा संशोधन

आपसी अनुबंधों एवं अन्‍य दस्‍तावेजों की प्रामाणिकता हेतु दस्‍तावेजों के पंजीकरण हेतु बनाये गये कानून भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 के आधार पर ही भूमि एवं भवनों के क्रय-विक्रय संव्‍यवहारों के दस्‍तावेजों का पंजीयक एवं उप पंजीयक कार्यालयों में पंजीयन होता है । पंजीकरण के पूर्व पंजीकरण करने वाले अधिकारी को दस्‍तावेजों में उल्‍लेखित भूमि व भवन या सम्‍पत्ति के वास्‍तविक विवरण का सत्‍यापन करना होता है । इसी सत्‍यापन के आधार पर दस्‍तावेजों में लगाये जाने वाले स्‍टाम्‍प व देय शुल्‍क का आंकलन हो पाता है व पक्षकारों के हक का पोषण भी हो पाता है । भवनों के बढते जंगलों व भूमि सम्‍पत्ति के बढते हस्‍तांतरणों के कारण पंजीकरण कार्यालयों के द्वारा भौतिक सत्‍यापन में ढील बरती जाती है इसी प्रकार दस्‍तावेजों के संग्रहण एवं दस्‍तावेजीकरण में बरसों से अपनाई जा रही पद्धति से रिकार्ड दुरूस्‍ती में भी समस्‍यायें आ रही है और पंजीकृत दस्‍तावेजों से संबंधित भू संपदा विवादों में वृद्धि होते जा रही है । इस समस्‍या के निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकि के प्रयोग से भू-दस्तावेजों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा है कि जमीनों के डिजिटल नक्शे तैयार करने और आंकड़ों के कंप्यूटरीकरण से ढेर सारी समस्याएं खत्म हो जाएगी। इससे निचली अदालतों में लंबित मामलों में कमी आएगी। इसके लिए भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में भी समुचित संशोधन किए जाएंगे। इसके चलते कागजी दस्तावेजों में भारी कमी आएगी।
ग्रामीण विकास मंत्री नें पिछले दिनों एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योजना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया था कि सरकार ने पहले से चल रही दो परियोजनाओं-कंप्यूटराइजेशन आफ लैंड रिकार्ड्स (सीएलआर) और रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन एंड अपडेटिंग आफ लैंड रिका‌र्ड्स को जोड़ दिया है। यह संयुक्त परियोजना नेशनल लैंड रिका‌र्ड्स माडर्नाइजेशन प्रोग्राम (एनएलआरएमपी) के नाम से जानी जाती है। इसमें भू-दस्तावेजों के तीन स्तरीय आंकड़े तैयार किए जाएंगे। एक-एक गांव को इकाई मानकर अंतरिक्ष से तैयार उच्च स्तरीय कैमरों के माध्यम से डिजिटल नक्शे, वन विभाग व भारतीय सर्वेक्षण विभाग के नक्शे और राजस्व विभाग के आंकड़ों पर आधारित अलग-अलग नक्शे बनाए जाएंगे। इससे जमीन की माप में किसी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। (गूगल मैप व सेटेलाईट व्‍यू की भांति भारतीय 'भुवन' )
परियोजना के बजट  के संबंध में में उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के कंप्यूटरीकरण में राज्य सरकारों की भूमिका सर्वाधिक होगी। पंचायत और राजस्व विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी से लैस करने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पूरी योजना पर 5 हजार 656 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। इसमें केंद्र का हिस्सा 3 हजार 98 करोड़ रुपये होगा। बाकी खर्च राज्यों को वहन करना होगा। योजना पर अमल के लिए क्षेत्रीय तकनीकी सलाहकार समूह का गठन किया जाएगा, जो जिला स्तर पर समुचित सलाह देगा। रजिस्ट्रेशन एक्ट के प्रावधानों में पर्याप्त संशोधन किया जाएगा व इस संबंध में तकनीकि विकसित किये जावेंगें । इससे अनुबंध पत्र और दस्तावेजों का प्रभाव डिजिटल मनी ट्रांसफर की भांति तत्‍काल किये जा सकेंगें व रकबे आदि के विवाद एवं एक सम्‍पत्ति को कई लोगों को बेंच दिये जाने के फर्जीवाडे पर तत्‍काल अंकुश लग सकेगा ।

Feb 11, 2009

ई-कोर्ट की ट्रायल ग्वालियर में होगी

ई-कोर्ट योजना के क्रियान्‍वयन की दिशा में मध्‍य प्रदेश में हो रहे प्रयासों की दिशा में पिछले दिनों समाचार पत्रों में कुछ उत्‍साहजनक समाचार व बयान नजर आया । हमारे सीनियर कौंसिल 'ब्‍लाग - अदालत'  में भी इस संबंध में दो समाचार क्रमश: देश की पहली ई-अदालत सच क्‍या हैई-कोर्ट और न्‍याय प्रणाली की साख पढने को मिला । विगत दिनों उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ के प्रशासनिक जज सुभाष संवत्सर ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए न्यायालय परिसर में पर्याप्त अधोसंरचना होना आवश्यक है। इस दिशा में उच्च न्यायालय की पहल पर प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में न्यायाधीशों के लिए कक्ष निर्माण सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा रही है।

जिला न्यायालय परिसर में गुरूवार को आठ नवीन न्यायालयीन कक्ष व बार रूम के भूमिपूजन समारोह को सम्बोधित करते हुए न्यायमूर्ति संवत्सर ने कहा जिला न्यायालय में ४१ न्यायाधीश पदस्थ हैं तथा पांच अतिरिक्त जजों की पदस्थापना भी हाल में की गई है। आठ अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के बाद स्थान की कमी दूर हो जाएगी।

साथ ही अभिभाषक कक्ष की मांग भी पूरी हो जाएगी। इस अवसर पर न्यायमूíत कृष्ण कुमार लाहोटी ने कहा कि न्यायिक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के मकसद से देश में ई-कोर्ट प्रणाली लागू होने जा रही है। इस प्रणाली के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे प्रायोगिक तौर पर देश के ६ शहरों की न्यायालयों में स्थापित किया जायेगा जिसमें ग्वालियर भी शामिल है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए के. मिश्रा ने जिला न्यायालय के कम्प्यूटरीकरण की पहल करने के लिए न्यायमूर्ति लाहौटी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। स्वागत उद्बोधन उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष डी के. कटारे व आभार प्रदर्शन सचिव रामविलास शर्मा ने किया। संचालन आलोक शर्मा ने किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति एस के. गंगेले, न्यायमूíत एस सी. शर्मा व एस एस. द्विवेदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता श्यामबिहारी मिश्रा समेत कई प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।

Feb 7, 2009

तीसरा खम्‍बा नें छत्‍तीसगढ के वकीलों का उत्‍साह बढाया (ब्लागर द्विवेदी जी का सम्‍मान)

विगत दिनों तीसरा खम्‍बा एवं अनवरत के श्री दिनेशराय द्विवेदी जी का भिलाई एवं रायपुर आगमन हुआ । रायपुर में श्री द्विवेदी जी का सम्‍मान एवं पत्रकार-ब्‍लागर्स मिलन का विवरण श्री अनिल पुसदकर जी नें विगत दिनों अपने पोस्‍ट  'ब्लागर सिर्फ़ ब्लागर ही नही होता बल्कि रिश्तेदार भी होता है' में किया था । छत्‍तीसगढ में श्री द्विवेदी जी के आगमन से उत्‍साहित दुर्ग अधिवक्‍ता संघ एवं उनके द्वारा निकाले जाने वाली बुलेटिन 'अभिभाषक वाणी' के सदस्‍यों नें उनसे मिलने की इच्‍छा जाहिर की सो हम 'अदालत' वाले श्री बी.एस.पाबला जी के घर अधिवक्‍ता व संपादक 'अभिभाषक वाणी' शकील अहमद सिद्धिकी जी के साथ पहुचे । भेंट-मुलाकात के साथ ही  दुर्ग अधिवक्‍ता संघ एवं उनके द्वारा निकाले जाने वाली बुलेटिन 'अभिभाषक वाणी' के सदस्‍यों की इच्‍छा शकील अहमद सिद्धकी जी नें  श्री द्विवेदी जी के सम्‍मुख रखी और समय तय किया गया, हम चर्चा में इस तरह रमें कि समय का ख्‍याल ही नहीं रहा, श्री दिनेश राय द्विवेदी जी एवं श्री बी.एस.पाबला जी को रायपुर 12.00 बजे श्री अनिल पुसदकर व संजीत त्रिपाठी जी से मिलने जाना था , सो हम न्‍यायालय की तरफ और श्री द्विवेदी जी रायपुर की तरफ निकल गये ।
  
 दूसरे दिन श्री द्विवेदी जी एवं श्री पाबला जी दुर्ग जिला न्‍यायालय पहुचे, जहां हम अपने अधिवक्‍ता मित्रों के साथ उपस्थित थे, श्री द्विवेदी जी नें पहले न्‍यायालय भवन व पुस्‍तकालय आदि का भ्रमण किया व न्‍यायालय, न्‍यायाधीशों एवं अधिवक्‍ताओं की संख्‍या आदि के संबंध चर्चा की । तदुपरांत  दुर्ग अधिवक्‍ता संघ के कार्यालय में उनका पुष्‍पाहार से स्‍वागत संघ के पदाधिकारियों एवं प्रदेश अधिवक्‍ता संघ के प्रतिनिधियों, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ताओं नें किया । 'अदालत' के श्री बी.एस.पाबला का भी पुष्‍पाहार से स्‍वागत किया गया । विगत चार माह से संघ के कई अधिवक्‍ता तीसरा खम्‍बा के नियमित पाठक थे जिसके कारण ब्‍लाग पाठक एवं लेखक के बीच की आत्‍मीयता कार्यक्रम में स्‍पष्‍ट परिलक्षित हो रही थी । आयोजित कार्यक्रम में  श्री द्विवेदी जी नें अधिवक्‍ता पेशे में आधुनिक संचार प्रणाली के उपयोग पर अपने विचार रखे एवं अपने अनुभवों को बांटा । अधिवक्‍ता कल्‍याण निधि के संबंध में भी महत्‍वपूर्ण चर्चा की गई । 
संबोधन व विचार विमर्श के पश्‍च्‍यात दुर्ग अधिवक्‍ता संघ के द्वारा कोटा से पघारे अपने अभिभाषक साथी का परम्‍परानुसार शाल व श्री फल, सम्‍मान पत्र  से सम्‍मान किया गया एवं सम्‍मान पत्र का वाचन वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता व 'अभिभाषक वाणी' के प्रधान संपादक श्री त्रिपाठी जी नें किया ।   
जूनियर कौंसिल अपने दोनों सीनियरों को अपने मित्रों द्वारा सम्‍मानित किये जाने व जूनियर को सीनियर के चरण स्‍पर्श का अवसर मिलने  से अभिभूत रहा ।
      
  
 कानूनी मसलों के ब्‍लागों पर विगत दिनों नवभारत टाईम्‍स द्वारा किये गये टिप्‍पणी के 'त्रयी' 

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