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Thursday, February 12, 2009

भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में भी होगा संशोधन

आपसी अनुबंधों एवं अन्‍य दस्‍तावेजों की प्रामाणिकता हेतु दस्‍तावेजों के पंजीकरण हेतु बनाये गये कानून भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 के आधार पर ही भूमि एवं भवनों के क्रय-विक्रय संव्‍यवहारों के दस्‍तावेजों का पंजीयक एवं उप पंजीयक कार्यालयों में पंजीयन होता है । पंजीकरण के पूर्व पंजीकरण करने वाले अधिकारी को दस्‍तावेजों में उल्‍लेखित भूमि व भवन या सम्‍पत्ति के वास्‍तविक विवरण का सत्‍यापन करना होता है । इसी सत्‍यापन के आधार पर दस्‍तावेजों में लगाये जाने वाले स्‍टाम्‍प व देय शुल्‍क का आंकलन हो पाता है व पक्षकारों के हक का पोषण भी हो पाता है । भवनों के बढते जंगलों व भूमि सम्‍पत्ति के बढते हस्‍तांतरणों के कारण पंजीकरण कार्यालयों के द्वारा भौतिक सत्‍यापन में ढील बरती जाती है इसी प्रकार दस्‍तावेजों के संग्रहण एवं दस्‍तावेजीकरण में बरसों से अपनाई जा रही पद्धति से रिकार्ड दुरूस्‍ती में भी समस्‍यायें आ रही है और पंजीकृत दस्‍तावेजों से संबंधित भू संपदा विवादों में वृद्धि होते जा रही है । इस समस्‍या के निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकि के प्रयोग से भू-दस्तावेजों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा है कि जमीनों के डिजिटल नक्शे तैयार करने और आंकड़ों के कंप्यूटरीकरण से ढेर सारी समस्याएं खत्म हो जाएगी। इससे निचली अदालतों में लंबित मामलों में कमी आएगी। इसके लिए भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में भी समुचित संशोधन किए जाएंगे। इसके चलते कागजी दस्तावेजों में भारी कमी आएगी।
ग्रामीण विकास मंत्री नें पिछले दिनों एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योजना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया था कि सरकार ने पहले से चल रही दो परियोजनाओं-कंप्यूटराइजेशन आफ लैंड रिकार्ड्स (सीएलआर) और रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन एंड अपडेटिंग आफ लैंड रिका‌र्ड्स को जोड़ दिया है। यह संयुक्त परियोजना नेशनल लैंड रिका‌र्ड्स माडर्नाइजेशन प्रोग्राम (एनएलआरएमपी) के नाम से जानी जाती है। इसमें भू-दस्तावेजों के तीन स्तरीय आंकड़े तैयार किए जाएंगे। एक-एक गांव को इकाई मानकर अंतरिक्ष से तैयार उच्च स्तरीय कैमरों के माध्यम से डिजिटल नक्शे, वन विभाग व भारतीय सर्वेक्षण विभाग के नक्शे और राजस्व विभाग के आंकड़ों पर आधारित अलग-अलग नक्शे बनाए जाएंगे। इससे जमीन की माप में किसी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। (गूगल मैप व सेटेलाईट व्‍यू की भांति भारतीय 'भुवन' )
परियोजना के बजट  के संबंध में में उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के कंप्यूटरीकरण में राज्य सरकारों की भूमिका सर्वाधिक होगी। पंचायत और राजस्व विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी से लैस करने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पूरी योजना पर 5 हजार 656 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। इसमें केंद्र का हिस्सा 3 हजार 98 करोड़ रुपये होगा। बाकी खर्च राज्यों को वहन करना होगा। योजना पर अमल के लिए क्षेत्रीय तकनीकी सलाहकार समूह का गठन किया जाएगा, जो जिला स्तर पर समुचित सलाह देगा। रजिस्ट्रेशन एक्ट के प्रावधानों में पर्याप्त संशोधन किया जाएगा व इस संबंध में तकनीकि विकसित किये जावेंगें । इससे अनुबंध पत्र और दस्तावेजों का प्रभाव डिजिटल मनी ट्रांसफर की भांति तत्‍काल किये जा सकेंगें व रकबे आदि के विवाद एवं एक सम्‍पत्ति को कई लोगों को बेंच दिये जाने के फर्जीवाडे पर तत्‍काल अंकुश लग सकेगा ।

Wednesday, February 11, 2009

ई-कोर्ट की ट्रायल ग्वालियर में होगी

ई-कोर्ट योजना के क्रियान्‍वयन की दिशा में मध्‍य प्रदेश में हो रहे प्रयासों की दिशा में पिछले दिनों समाचार पत्रों में कुछ उत्‍साहजनक समाचार व बयान नजर आया । हमारे सीनियर कौंसिल 'ब्‍लाग - अदालत'  में भी इस संबंध में दो समाचार क्रमश: देश की पहली ई-अदालत सच क्‍या हैई-कोर्ट और न्‍याय प्रणाली की साख पढने को मिला । विगत दिनों उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ के प्रशासनिक जज सुभाष संवत्सर ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए न्यायालय परिसर में पर्याप्त अधोसंरचना होना आवश्यक है। इस दिशा में उच्च न्यायालय की पहल पर प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में न्यायाधीशों के लिए कक्ष निर्माण सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा रही है।

जिला न्यायालय परिसर में गुरूवार को आठ नवीन न्यायालयीन कक्ष व बार रूम के भूमिपूजन समारोह को सम्बोधित करते हुए न्यायमूर्ति संवत्सर ने कहा जिला न्यायालय में ४१ न्यायाधीश पदस्थ हैं तथा पांच अतिरिक्त जजों की पदस्थापना भी हाल में की गई है। आठ अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के बाद स्थान की कमी दूर हो जाएगी।

साथ ही अभिभाषक कक्ष की मांग भी पूरी हो जाएगी। इस अवसर पर न्यायमूíत कृष्ण कुमार लाहोटी ने कहा कि न्यायिक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के मकसद से देश में ई-कोर्ट प्रणाली लागू होने जा रही है। इस प्रणाली के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे प्रायोगिक तौर पर देश के ६ शहरों की न्यायालयों में स्थापित किया जायेगा जिसमें ग्वालियर भी शामिल है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए के. मिश्रा ने जिला न्यायालय के कम्प्यूटरीकरण की पहल करने के लिए न्यायमूर्ति लाहौटी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। स्वागत उद्बोधन उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष डी के. कटारे व आभार प्रदर्शन सचिव रामविलास शर्मा ने किया। संचालन आलोक शर्मा ने किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति एस के. गंगेले, न्यायमूíत एस सी. शर्मा व एस एस. द्विवेदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता श्यामबिहारी मिश्रा समेत कई प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।

Saturday, February 7, 2009

तीसरा खम्‍बा नें छत्‍तीसगढ के वकीलों का उत्‍साह बढाया (ब्लागर द्विवेदी जी का सम्‍मान)

विगत दिनों तीसरा खम्‍बा एवं अनवरत के श्री दिनेशराय द्विवेदी जी का भिलाई एवं रायपुर आगमन हुआ । रायपुर में श्री द्विवेदी जी का सम्‍मान एवं पत्रकार-ब्‍लागर्स मिलन का विवरण श्री अनिल पुसदकर जी नें विगत दिनों अपने पोस्‍ट  'ब्लागर सिर्फ़ ब्लागर ही नही होता बल्कि रिश्तेदार भी होता है' में किया था । छत्‍तीसगढ में श्री द्विवेदी जी के आगमन से उत्‍साहित दुर्ग अधिवक्‍ता संघ एवं उनके द्वारा निकाले जाने वाली बुलेटिन 'अभिभाषक वाणी' के सदस्‍यों नें उनसे मिलने की इच्‍छा जाहिर की सो हम 'अदालत' वाले श्री बी.एस.पाबला जी के घर अधिवक्‍ता व संपादक 'अभिभाषक वाणी' शकील अहमद सिद्धिकी जी के साथ पहुचे । भेंट-मुलाकात के साथ ही  दुर्ग अधिवक्‍ता संघ एवं उनके द्वारा निकाले जाने वाली बुलेटिन 'अभिभाषक वाणी' के सदस्‍यों की इच्‍छा शकील अहमद सिद्धकी जी नें  श्री द्विवेदी जी के सम्‍मुख रखी और समय तय किया गया, हम चर्चा में इस तरह रमें कि समय का ख्‍याल ही नहीं रहा, श्री दिनेश राय द्विवेदी जी एवं श्री बी.एस.पाबला जी को रायपुर 12.00 बजे श्री अनिल पुसदकर व संजीत त्रिपाठी जी से मिलने जाना था , सो हम न्‍यायालय की तरफ और श्री द्विवेदी जी रायपुर की तरफ निकल गये ।
  
 दूसरे दिन श्री द्विवेदी जी एवं श्री पाबला जी दुर्ग जिला न्‍यायालय पहुचे, जहां हम अपने अधिवक्‍ता मित्रों के साथ उपस्थित थे, श्री द्विवेदी जी नें पहले न्‍यायालय भवन व पुस्‍तकालय आदि का भ्रमण किया व न्‍यायालय, न्‍यायाधीशों एवं अधिवक्‍ताओं की संख्‍या आदि के संबंध चर्चा की । तदुपरांत  दुर्ग अधिवक्‍ता संघ के कार्यालय में उनका पुष्‍पाहार से स्‍वागत संघ के पदाधिकारियों एवं प्रदेश अधिवक्‍ता संघ के प्रतिनिधियों, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ताओं नें किया । 'अदालत' के श्री बी.एस.पाबला का भी पुष्‍पाहार से स्‍वागत किया गया । विगत चार माह से संघ के कई अधिवक्‍ता तीसरा खम्‍बा के नियमित पाठक थे जिसके कारण ब्‍लाग पाठक एवं लेखक के बीच की आत्‍मीयता कार्यक्रम में स्‍पष्‍ट परिलक्षित हो रही थी । आयोजित कार्यक्रम में  श्री द्विवेदी जी नें अधिवक्‍ता पेशे में आधुनिक संचार प्रणाली के उपयोग पर अपने विचार रखे एवं अपने अनुभवों को बांटा । अधिवक्‍ता कल्‍याण निधि के संबंध में भी महत्‍वपूर्ण चर्चा की गई । 
संबोधन व विचार विमर्श के पश्‍च्‍यात दुर्ग अधिवक्‍ता संघ के द्वारा कोटा से पघारे अपने अभिभाषक साथी का परम्‍परानुसार शाल व श्री फल, सम्‍मान पत्र  से सम्‍मान किया गया एवं सम्‍मान पत्र का वाचन वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता व 'अभिभाषक वाणी' के प्रधान संपादक श्री त्रिपाठी जी नें किया ।   
जूनियर कौंसिल अपने दोनों सीनियरों को अपने मित्रों द्वारा सम्‍मानित किये जाने व जूनियर को सीनियर के चरण स्‍पर्श का अवसर मिलने  से अभिभूत रहा ।
      
  
 कानूनी मसलों के ब्‍लागों पर विगत दिनों नवभारत टाईम्‍स द्वारा किये गये टिप्‍पणी के 'त्रयी' 

Tuesday, November 18, 2008

राज ठाकरे

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को राज्य में राज ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, मनसे द्वारा उत्तर भारतीयों और गैर-मराठियों के खिलाफ चलाए गए हिंसक अभियान को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने में कथित तौर पर असफल रहने के लिए नोटिस जारी किया ।

परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने बिहारी युवक राहुल राज, जो विवादास्पद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था और उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति की पिछले महीने मुंबई की रेल में हुई हत्या की न्यायिक जांच कराने की अपील ठुकरा दी ।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश के.जी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में न्यायिक पीठ ने जारी किये, जो महाराष्ट्र में मनसे द्वारा हाल में कथित तौर पर की गई हिंसा और बिहार तथा झारखंड जैसे अन्य राज्यों में इसके बाद हुई प्रतिक्रियाओं और प्रदर्शनों से संबंधित दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी ।

वकील सुग्रीव दुबे ने आरोप लगाया था कि हाल ही में जब श्री राज ठाकरे द्वारा भड़काए जाने पर भीड़ ने दो उत्तर भारतीय डॉक्टर भाइयों- 35-वर्षीय अजय और 33-वर्षीय विजय दुबे की हत्या की थी, तो राज्य पुलिस मूक दर्शक बनी रही थी । अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से इस आरोप का जवाब देने के लिए कहा है ।

श्री दुबे, जो दिल्ली स्थित व्यापारी सलेक चंद जैन की ओर से पैरवी कर रहे थे, ने कहा कि मनसे द्वारा उत्तर भारतीयों पर किये गए कथित हमलों के कारण देश में अन्यत्र उससे संबंधित प्रतिक्रियाएं हुई हैं, जिनसे राष्ट्र की एकता और अखंडता के नष्ट होने का खतरा है ।

वकील ने यह भी कहा कि राज्य में संवैधानिक संकट है और केंद्र भी मूक दर्शक बना रहा तथा उसने राज्य के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने के लिए संविधान की धारा-355 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं किया, लेकिन पीठ ने गृह मंत्रालय के खिलाफ कोई निर्देश जारी नहीं किया । 
उधर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री आर.आर पाटिल ने सोमवार को मुंबई में कहा कि महाराष्ट्र सरकार इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब देगी । उन्होंने कहा कि हम विस्तृत जवाब देंगे और अपनी स्थिति का खुलासा करेंगे ।

श्री पाटिल, जो गृह मंत्रालय भी देखते हैं, ने पत्रकारों को बताया कि कानून एवं न्याय विभाग को इस मुद्दे पर विवरण तैयार करने के लिए कहा जाएगा ।

Saturday, November 8, 2008

दिल्ली उच्च न्यायालय नें दिया समलिंगी यौन संबंध को मान्‍यता

दिल्‍ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ में प्रस्‍तुत  एक याचिका में समलिंगी संगठनों द्वारा समलिंगी यौन संबंधों पर से कानूनी पाबंदी हटाने की मांग की गई थी, इसकी सुनवाई के दौरान यह स्‍पस्‍ट किया गया कि भारत में समलिंगी यौन संबंध कानूनी रूप से अवैध हैं. किन्‍तु दिल्ली उच्च न्यायालय ने समलिंगी यौन संबंधों को कानूनी मान्यता देते हुए कहा है कि ऐसे संबंधों को अस्वास्थ्यकर नहीं कहा जा सकता.

न्यायालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला देते हुए कहा कि, कई देशों ने समलिंगी यौन संबंधों को मान्यता दी है, लेकिन वहाँ पर किसी ने भी इससे कोई बिमारी होने का दावा नहीं किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी यह नहीं कहता कि यह अस्वास्थ्यकर है. लोग तो हर जगह एक जैसे ही होते हैं.”

समाचार - 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) को समाप्त करने की माँग करने वाली नाज फाउंडेशन की याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रखा।

मुख्य न्यायाधीश एपी शाह और न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर की खंडपीठ ने सभी पक्षों की लंबी जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित किया। इस मामले पर पिछले कई दिनों से दिन-प्रतिदिन सुनवाई हो रही थी।

नाज फाउंडेशन की ओर से वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि आईपीसी की धारा 377 ब्रिटिश राज में इंग्लैंड के समलैंगिक यौन संबंध के कानून की तर्ज पर 1860 में लागू की गई थी, लेकिन अब बदलते समय के अनुरूप कानून को समाप्त किए जाने की आवश्यकता है।

केन्द्र सरकार धारा 377 को बरकरार रखने के पक्ष में है। अतिरिक्त सालिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने धारा 377 समाप्त करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे एचआईवी के फैलने की आशंका बढ़ जाएगी।

मल्होत्रा ने कहा देश में असामान्य यौन संबंधों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। परम्परागत मूल्यों का हमारा लंबा इतिहास है, ऐसा होने से इन मूल्यों में गिरावट आएगी। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में एक धार्मिक उद्धरण का भी उल्लेख किया।

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा कि स्वास्थ्य और समाज को समलैंगिक यौन संबंधों से होने वाले नुकसान के अपने दावे की पुष्टि के लिए और वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करे।

नाज फाउंडेशन के एक समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता की अप्राकृतिक यौन संबंधों को औपनिवेश काल का कानून बताते हुए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एमपी शाह और न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने समलैंगिक यौन संबंधों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार को और वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत करने को कहा है।

न्यायालय ने धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) को भारतीय दंड संहिता में बनाए रखने के लिए अपर्याप्त तथ्य प्रस्तुत करने के लिए केन्द्र सरकार की खिंचाई भी की। धारा 377 ब्रिटिश राज में 1860 में इंग्लैंड के कानून की तर्ज पर लागू की गई थी।

 
नई सदी में अब ऐसे भी मामलों पर रूचिकर बहस और चर्चा योग्‍य निर्णय आ रहे हैं जिसे कामुक पत्र पत्रिकाओं एवं साईटों पर नमक मिर्च के साथ प्रस्‍तुत किया जा सके ।  इन्‍हीं मामलों में भारत का विकास कुछ ज्‍यादा हो रहा है ........

Wednesday, October 29, 2008

साध्वी प्रज्ञा का होगा नार्को टेस्ट

नासिक की एक अदालत ने मालेगांव बमकांड के सिलसिले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नार्को टेस्ट करने का आदेश दिया।


सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी आतंकवाद निरोधक दस्ते ने नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय में अर्जी देकर साध्वी का नार्को [ब्रेन मैपिंग] और पोलीग्राफ टेस्ट [झूठ बोलने का परीक्षण] करने की अनुमति मांगी थी।

एटीएस के वकील अजय मिसर ने अदालत को बताया कि परीक्षण मुंबई में होंगे। साध्वी प्रज्ञा को 29 सितंबर को मालेगांव में हुए बम विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है और वह तीन नवंबर तक पुलिस हिरासत में हैं। उक्त बम विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और सौ से अधिक लोग घायल हुए थे।

साभार - याहू जागरण

नासिक कोर्ट ने मुंबई एटीएस को मालेगांव धमाका मामले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नार्को टेस्ट करवाने की इजाजत दे दी है।


मुंबई एटीएस ने आज नासिक कोर्ट में एक अर्जी दायर कर प्रज्ञा का नार्को टेस्ट करवाने की इजाजत मांगी जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए कहा कि जांच को सही अंजाम तक पहुंचाने के लिए पुलिस नार्को टेस्ट करवा सकती है।

गौरतलब है कि मालेगांव ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत दो अन्य आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इसी साल 29 सितंबर को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में पांच लोगों की मौत हुई थी।

मुंबई एटीएस टीम सूरत से प्रज्ञा, इंदौर से श्यामलाल साहू, शिवनारायण सिंह, दिलीप नायर तथा देवास से धर्मेद्र बैरागी को पूछताछ के लिए मुंबई ले आई थी। इन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार कर नासिक कोर्ट में पेश किया गया। सरकारी वकील अजय मिश्रा के मुताबिक तीनों आरोपियों पर धारा 302, 307 व 326 के तहत मामला दर्ज किया गया।

साभार - दैनिक भास्‍कर

Tuesday, October 28, 2008

जमानती मामले में फंसे गरीब कैदियों को मुचलके पर छोडें

बांबे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी जमानती अपराध के सिलसिले में गिरफ्तार व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण जमानत दे पाने में असमर्थ हो तो उसे एक सप्ताह के भीतर निजी मुचलके पर रिहा कर दिया जाना चाहिए।


कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 436 में हुए संशोधन में इस बात के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके अनुसार, यदि आरोपी एक हफ्ते के भीतर जमानतदार का बंदोबस्त कर पाने में अक्षम हो तो उसे निर्धन मानकर निजी मुचलके पर भी रिहा किया जा सकता है। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि उसके इस निर्देश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित जेल प्रभारी को अपनी जेब से मुआवजा भरना होगा।

क्यों दिया ऐसा फैसला : जस्टिस एफआई रिबेलो तथा आशुतोष कुंभकोणी की बेंच ने इस साल के प्रारंभ में महाराष्ट्र के येरवदा और रत्नागिरी की जेलों का दौरा करने के बाद पाया कि मामूली अपराध के सिलसिले में कई विचाराधीन कैदी जेल में इसलिए बंद हैं, क्योंकि वे अपने लिए जमानतदार नहीं जुटा सके। अब एक हत्या के मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि अकेले मुंबई के आर्थर रोड जेल के 2296 कैदियों में से 1660 कैदी जमानती अपराधों के सिलसिले में बंद हैं।
कोर्ट हैरान : जजों ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि तीन साल पहले लागू सीआरपीसी की धारा 436 (संशोधित) के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर जमानतदार न जुटा पाने पर आरोपी को निर्धन मान लिए जाने का प्रावधान है।

कोर्ट के निर्देश : कोर्ट ने महाराष्ट्र और केंद्र शासित क्षेत्र दीव, दमन और दादरा व नगर-हवेली को इस संशोधित प्रावधान को फौरन लागू करने को कहा है। इसके अलावा प्रमुख सेशंस जजों से भी कहा गया है कि वे निचली अदालतों से हर माह रिहा किए जाने वाले कैदियों के बारे में रिपोर्ट मांगें। बांबे हाईकोर्ट हर साल इस मामले की समीक्षा करेगी।

समाचार - भास्‍कर से साभार

राज ठाकरे की याचिका पर सुनवाई 14 नवंबर को

http://www.merikhabar.comझारखंड हाईकोर्ट ने महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे की उस याचिका पर 14 नवंबर तक के लिए सुनवाई टाल दी है, जिसमें उन्‍होंने निचली अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाने की मांग की थी। उनके खिलाफ छठ पर्व को लेकर लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने का आरोप है।

राज ठाकरे के वकील नीरज राय ने बताया कि जस्टिस बी. के. सिंह की एकल खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के लिए 14 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है। गत 30 सितंबर को जमशेदपुर की एक अदालत ने राज ठाकरे के खिलाफ गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. इसके खिलाफ उन्‍होंने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

गौरतलब है कि जमशेदपुर के एक वकील हामिद रजा ने गत 2 फरवरी को राज ठाकरे के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था. राज पर आरोप है कि उन्‍होंने छठ पूजा के बारे में अनर्गल बयान दिया है।

http://www.merikhabar.com

Monday, October 27, 2008

संविधान का उल्लंघन करने वालों की खैर नहीं

कैबिनेट मंत्री शिवराज पाटिल ने मंगलवार को राज्यसभा को आश्वस्त किया कि संविधान का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार को तीन नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन विपक्षी सदस्य इससे संतुष्ट नहीं हुए और सदन से बहिर्गमन कर गए।
सदन में शून्यकाल के दौरान मुंबई में उत्तर भारतीयों पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे हमलों पर नाराजगी जाहिर की गई। इस मामले पर विपक्षी सदस्यों के साथ कांग्रेसी सदस्यों ने भी चिंता जताई।
सदस्यों की चिंता का निराकरण करने का प्रयास करते हुए पाटिल ने सदन को बताया कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र को इस मामले पर तीन नोटिस भी जारी कर चुकी है।
विपक्षी सदस्यों द्वारा धारा 355 के तहत कार्रवाई करने की मांग के जवाब में पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार जब भी किसी राज्य सरकार को नोटिस जारी करती है तो नोटिस में यह नहीं लिखा जाता कि किस धारा के तहत नोटिस दिया जा रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि उनके अलावा रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी राज्य के मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और राज्य के गृहमंत्री से भी चर्चा कर घटना पर नाराजगी जताई थी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें सूचित किया है कि दो लाख 29 हजार आवेदकों को नोटिस देकर परीक्षा के लिए बुलाया गया था तथा 307 स्थानों पर परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि कोई भी छात्र बिना परीक्षा दिए नहीं लौटा।
पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार से प्राप्त सूचना के अनुसार कुल 1861 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 336 के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा एहतियाती तौर पर 3837 लोगों को हिरासत में लिया गया।
गृहमंत्री ने कहा कि देश के हर नागरिक को यह संविधान प्रदत्त अधिकार है कि वह देश के किसी भी प्रांत में काम कर सकता है। ऐसा करने पर अगर कोई किसी को मारता है तो वह निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि ऐसे गलत विचार कुछ लोगों के हो सकते हैं सभी महाराष्ट्रवासियों के नहीं। पाटिल के इन आश्वासनों से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य गृहमंत्री का आधा जवाब सुनकर ही वाकआउट कर गए।
पाटिल ने कहा कि संकीर्णतापूर्ण विचारों तथा मुद्दों पर राजनीति करने से न तो कोई लाभ होगा और न ही कोई हल निकलेगा। उन्होंने कई बार दोहराया कि संविधान का उल्लंघन करने वालों के साथ नरमी नहीं बरती जाएगी लेकिन विपक्षी सदस्य दोषियों के खिलाफ कार्रवाही की मांग करते रहे।
समाचार साभार : याहू जागरण