Aug 31, 2016

2013 पीएससी परीक्षा पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

The Petitioners have fought a long drawn out battle. It is only because of the persistence and tenacity of the Petitioners, especially Ku. Varsha Dongre that these irregularities, acts of corruption, nepotism, favourtism etc. have been brought out. Therefore, Chhattisgarh Public Service Commission is burdened with costs of Rs.5,00,000/- in the writ petition of Petitioner Ku. Varsha Dongre, which shall be paid to her and Rs. 2,00,000/- in the other writ petition where both the Writ Petitioners will get Rs.1,00,000/- each. Exemplary costs have been awarded because of the totally false stand taken by the Chhattisgarh Public Service Commission earlier and its obstinacy in not correcting the mistakes for which permission was granted to it on its own application by this Court vide order dated 26.10.2007. The costs be paid on or before 31st October, 2016.
कोर्ट ने वर्षा डोंगरे, चमन सिन्‍हा, रविन्‍द्र सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए पीएससी को प्रश्‍न पत्रों को कोर्ट की निगरानी में जांच करने, इसी के आधार पर रिस्केलिंग कर नई मैरिट सूची तैयार कर अभ्यार्थियों का साक्षात्कार लेकर चयन सूची जारी करने का आदेश दिया। इसके साथ ही चयनित होने वाले नए उम्मीदवार को 2003 से वरिष्ठता का लाभ देनें और अपात्र होने वाले चयनित उम्मीदवार को बाहर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पीएससी को सभी कार्रवाई 31 अक्टूबर तक पूरी कर कोर्ट को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। संपूर्ण फैसला आप इस लिंक से पढ़़ सकते हैं -
अन्‍य महत्‍वपूर्ण न्‍याय निर्णयों के लिए यहॉं क्लिक करें

Aug 21, 2016

गंगाराम आत्मज सुखुराम व अन्य विरूद्ध गजानंद आ. जरहाराम व अन्य

वादीगण की ओर से वादभूमि का वर्ष 2003-04 की बी-1 किस्तबंदी खतौनी, खसरा एवं नक्शा की प्रति क्रमश: प्र.पी.1, प्र.पी.2 व प्र.पी.3 प्रस्तुत की गई है, जिनमें वादभूमि जरहाराम के नाम से बतौर भूमिस्वामी दर्ज है। उक्त दस्तावेजों के अतिरिक्त वादभूमि से संबंधित अन्य केाई दस्तावेज जैसे वादभूमि क्रय करने से संबंधित विक्रय-पत्र की प्रति अथवा नामंातरण पंजी की प्रति भी अभिलेख में नहीं है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि उक्त संपत्ति जरहाराम के नाम कैसे दर्ज हुई। वादीगण द्वारा परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर अन्य जगहों पर भी संयुक्त परिवार की संपत्ति से भूमि क्रय किए जाने का अभिवचन किया गया है, किंतु न तो परिवार के ऐसे सदस्यों के नाम अथवा ना ही क्रय की गई कथित भूमियों के संबंध में कोई स्पष्‍ट अभिवचन अथवा दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
स्वत्व घोषणा का वाद निम्‍न न्‍यायालय का फैसलाा न्यायालय-व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-दो दल्लीराजहरा, जिला दुर्ग, छत्‍तीसगढ़

Oct 11, 2014

सीजे ने राह दिखाई, इन पर चलना चुनौती

शख्सियत : 
सोलर प्लांट, ऑनलाइन ऑर्डर, फास्ट ट्रैक कोर्ट समेत कई फैसलों के लिए जाने जाएंगे यतींद्र सिंह

-अनुपम सिंह

तारीख-9 दिसंबर 2012, समय- दोपहर करीब 3 बजे, जगह- पुराने हाईकोर्ट की लाइब्रेरी, कार्यक्रम- नए चीफ जस्टिस यतींद्र सिंह का हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सम्मान समारोह... पहली बार वकीलों से रू-ब-रू होते हुए चीफ जस्टिस यतींद्र सिंह ने इस मौके पर कुछ घोषणाएं कीं। जजों, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति सार्वजनिक करने, फुलकोर्ट के मिनट्स वेबसाइट पर अपलोड करने या फिर हाईकोर्ट कैंपस को सोलर प्लांट से रोशन करने का मामला हो, सभी फैसलों, घोषणाओं पर अमल शुरू हो गया है।

फैसले और मिनट्स ऑनलाइन हुए- 9 दिसंबर 2012 को हुए समारोह में एक दिन पहले फुल कोर्ट के फैसले सार्वजनिक किए गए थे। इसके बाद अब तक फुल कोर्ट की जितनी भी मीटिंग्स हुई हैं, उनमें हुई चर्चा फैसलों की पूरी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध करवाई जा रही है। हाईकोर्ट के फैसले भी ऑनलाइन हो रहे हैं।

रेलवे का रिजर्वेशन काउंटर खुलवाया- रिटायरमेंट से एक दिन पहले ही सीजे यतींद्र सिंह ने हाईकोर्ट कॉलोनी समेत क्षेत्र की जनता को रेलवे रिजर्वेशन काउंटर की सौगात दिलवाई। इसकी पहल उन्होंने खुद की थी और कहा था कि इसे सिर्फ कॉलोनी वालों के बजाय पूरे इलाके के लोगों के लिए खोला जाए।

12 साल के हो रहे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए ये फैसले कई मायने में ऐतिहासिक और मील का पत्थर हैं। न्यायपालिका क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए इतने बड़े फैसले पहली बार लिए गए। इसमें से अधिकांश घोषणाओं पर अमल हो रहा है। सीजे ने 22 अक्टूबर 2012 को यहां ज्वॉइन किया था। वे 8 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। अब हाईकोर्ट प्रशासन के सामने इन्हें बरकरार रखना बड़ी चुनौती होगा।

घोषणाएं जिन पर अमल से बनी अलग पहचान

जजोंकी संपत्ति हुई ऑनलाइन- हाईकोर्ट और सब-ऑर्डिनेट कोर्ट के जजों, अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक है। 10 जनवरी 2013 को सबसे पहले सीजे ने अपनी संपत्ति सार्वजनिक की। इसके बाद हाईकोर्ट समेत प्रदेश के सभी जजों ने ऐसा किया। हाईकोर्ट कर्मचारियों की संपत्ति की जानकारी वेबसाइट पर है।

हाईकोर्ट कॉलोनी आबाद हुई- छत्तीसगढ़ आने के बाद रायपुर से बिलासपुर आने के दौरान सीजे ने हाईकोर्ट की आवासीय कॉलोनी देखी। उन्होंने इसे शहर की सबसे सुंदर कॉलोनी बनाने की घोषणा की। 31 अक्टूबर 2012 को न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों से विकल्प मांगा गया। सबसे पहले खुद कॉलोनी में शिफ्ट हुए। यहां प्लेग्राउंड, इनडोर गेम्स की सुविधा, बच्चों और महिलाओं के लिए कंप्यूटर ट्रेनिंग की व्यवस्था की। कैंपस हरा करने बड़ी संख्या में पौधे लगवाए। साल में एक बार खास आयोजन भी हुए।

वकीलों को मिले चेंबर- हाईकोर्ट में बने चेंबर का मामला सालों से अधर में पड़ा था। वकील सालों से इनकी मांग कर रहे थे। कई बार कोशिश की गई, लेकिन आवंटन नहीं हो पाया। चेंबर आवंटन को लेकर महाधिवक्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई। कमेटी ने नियम शर्तें तय की। प्रक्रिया पूरी होने के बाद वकीलों को चेंबर आवंटित कर दिए गए।

सोलर प्लांट से रोशन हो रही बिल्डिंग- हाईकोर्ट में छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास निगम (क्रेडा) ने 500 किलोवॉट क्षमता के सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना की है। 4 मार्च 2013 को इसकी घोषणा की गई थी। प्लांट में बैटरी बैंक नहीं है और यह सीधे बिजली सप्लाई के लिए लगाए गए पॉवर ग्रिड से जुड़ा है। यानी प्लांट में उत्पादन के बाद हाईकोर्ट को सीधे बिजली मिल रही है। बाकी बिजली पॉवर ग्रिड में जाती है। प्लांट से हर रोज 2000 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका उपयोग हाईकोर्ट में किया जा रहा है। इससे करीब हर साल 40 लाख रुपए की बचत होगी।

दुष्कर्म मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट- दुष्कर्म से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का निर्णय लिया गया। जजों की कमेटी ने दुष्कर्म के मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारे के लिए प्रदेश की सभी निचली अदालतों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करने की अनुशंसा की थी। फुल कोर्ट ने इन मामलों में अधीनस्थ अदालतों में ट्रायल के स्तर और हाईकोर्ट में अपील के स्तर पर मॉनिटरिंग करने का भी फैसला लिया है।

रायपुर और कोरबा में इवनिंग कोर्ट को मंजूरी- फुल कोर्ट ने प्रदेश में इवनिंग कोर्ट शुरू करने की दिशा में पहल करते हुए दि इवनिंग कोर्ट रूल्स 2013 को मंजूरी दी। इसके तहत राजानी रायपुर और कोरबा में फुल कोर्ट खोलने के लिए संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश को तारीख तय करने के निर्देश दिए गए।

ओपन सोर्स सिस्टम को बढ़ावा दिया- सीजे कंप्यूटर के एक्सपर्ट हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की तर्ज पर उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की वेबसाइट तैयार करवाई। उन्होंने ओपन सोर्स सिस्टम को बढ़ावा दिया, यानी इसके लिए साॅफ्टवेयर खरीदने की जरूरत नहीं है। इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध साॅफ्टवेयर का ज्यादातर उपयोग किया जा रहा है।

येभी रहे महत्वपूर्ण फैसले - छत्तीसगढ़स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी की नई बिल्डिंग को मंजूरी / जजों के तबादले के लिए नई नीति जारी की गई / अधीनस्थ न्यायालयों में जजों के खाली पदों पर भर्ती की मंजूरी / राज्य के सभी जिला न्यायालयों में विजिलेंस सेल को मंजूरी / नक्सल क्षेत्रों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव मंजूर / कई जिलों में फैमिली कोर्ट शुरू करने का प्रस्ताव मंजूर / 10 जिलों में स्पेशल एट्रोसिटी कोर्ट खोलने को मंजूरी / हाईकोर्ट में कवर्ड पाथ-वे की वकीलों की मांग मंजूर की आदि. 

My Blog List