Jan 14, 2017

जयचंद बैद मामले में आरोपी सांसद रामा सिंह बरी, अशोक को आजीवन कारावास





विशेष न्यायाधीश मंसूर अहमद ने जयचंद वैद्य अपहरण कांड में निर्णय देते हुए आरोपी सांसद रामा किशोर सिंह उर्फ रामा को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने अपने नर्णिय में लिखा है कि आरोपी रामा सिंह के विरूद्ध ऐसा कोई साक्ष्य प्रकरण में उपलब्ध नहीं है। जो उसे अपराध से जोड़ता हो। प्रार्थी जयचंद की कार का उपयोग अभियुक्त रामा सिंह के द्वारा किए जाने के संबंध में किसी भी साक्षी ने कोई कथन नहीं दिया है और न ही प्रार्थी की कार अभियुक्त रामा सिंह के आधिपत्य से जब्त की गई है। जहां तक अभियुक्त रामा सिंह के द्वारा अन्य अभियुक्तों को राजनीतिक संरक्षण दिए जाने का सवाल है तो इस प्रकरण में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने माना कि अभियुक्त रामा सिंह के द्वारा प्रार्थी जयचंद वैद्य के परिवार वालों से फिरौती की राशि प्राप्त की गई हो। इस संबंध में भी कोई साक्ष्य नहीं है। परिणाम स्वरूप साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त रामा सिंह को दोष मुक्त किया जाता है। जबकि अभियोजन अभियुक्त अशोक सिंह के विरूद्ध अपना मामला प्रमाणित करने में पूर्णत: सफल रहा है। न्यायालय ने अशोक सिंह को धारा 120 बी में 5 साल, 5 हजार अर्थदंड व अर्थदंड नहीं पटाने पर एक वर्ष अतिरक्ति, 364 ए में आजीवन कारावास, अर्थदंड 10 हजार व अर्थदंड नहीं पटाने पर 1 वर्ष अतिरक्ति कारावास, धारा 344 व 346 में एक-एक वर्ष व 2-2 हजार रूपए अर्थदंड, अर्थदंड नहीं पटाने पर 3-3 माह का अतिरक्ति कारावास एवं 395 में 7 वर्ष व 10 हजार रूपए अर्थदंड, अर्थदंड नहीं पटाने पर एक वर्ष अतिरक्ति कारावास की सजा पारित की है। अभियोजन पक्ष की ओर अपर लोक अभियोजक संतोष शर्मा और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिवशंकर सिंह और विनय दुबे ने पैरवी की। आरोपी सांसद के बरी होने की खबर पाकर बिहार से सैकड़ों समर्थक कोर्ट में एकत्रित थे।

भिलाई के बहुचर्चित जयचंद बैद अपहरण कांड में सबूत नहीं मिलने के कारण कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी वैशाली के सांसद रामा सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है, लेकिन इसी मामले में एक अन्य आरोपी अशोक सिंह को आजीवन कारावास और 27 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जयचंद ने गवाही के दौरान उसे सेवादार बताया था, लेकिन सांसद को पहचानने से इनकार कर दिया था। 29 मार्च 2001 को कुम्हारी पेट्रोल पंप से शैलेंद्र नगर रायपुर स्थित जयचंद बैद घर जाने के लिए निकले थे। भाटागांव के पास उनकी कार को ओवरटेक कर रोका गया। कार से 3 लोग उतरे और मारपीट करते हुए अपनी कार में बिठाकर ले गए। 20 घंटे के बाद उन्हें गुप्त स्थान पर ले जाकर रखा गया। उनके परिजनों से फिरौती की राशि मांगी गई। लंबी सौदेबाजी के बाद 20 लाख में मामला तय हुआ। 30 मार्च को जयचंद के परिजनों ने कुम्हारी पुलिस में उनके गुम होने की शिकायत की। फिरौती की मांग होने पर भिलाई-3 पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया था। इसी आधार पर मामले की विवेचना की जाती रही।




इसलिए मिला संदेह का लाभ : कोर्ट में सुनवाई के दौरान जयचंद बैद ने आरोपी को पहचानने से इनकार कर दिया था। फिरौती की रकम और सांसद के निवास पर मिली गाड़ी के संबंध में कोई ठोस बात नहीं कही। इसी आधार पर विशेष न्यायाधीश मंसूर अहमद ने फैसला सुनाया है। फैसले के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया है।

किसी भी गवाह ने रामा सिंह के बारे में कुछ भी नहीं बताया : पुलिस ने इस केस में 11 गवाह बनाए थे। इनमें से एक भी गवाह ने रामा सिंह को इस केस में लिप्त नहीं बताया। बल्कि कई गवाहों ने तो यह कहा कि उन्हें पुलिस ने क्यों गवाह बना दिया उन्हें नहीं मालूम। वे इसके बारे में कुछ नहीं जानते। एक गवाह जो जयचंद वैद के पेट्रोल पंप का मैनेजर था, उसे भी पुलिस ने गवाह बनाया था, लेकिन अर्से से लापता है। अभियोजन उसे कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाया।
आरोप: जयचंद के अपहरण के बाद ली गई 25 लाख फिरौती में से रामा सिंह को भी हिस्सा मिला था।
साक्ष्य: अभियोजन यह भी साबित नहीं कर पाया। साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर पाया। जयचंद उसे पहचान भी नहीं सका।
आरोप : पुलिस की विवेचना में यह बात आई कि अपहरण के प्रयुक्त कार रामा सिंह के निवास के पास से बरामद की गई थी।
साक्ष्य: अभियोजन यह साबित ही नहीं कर पाया कि कार रामा सिंह के घर के पास बरामद हुई।




Jan 4, 2017

पीड़ितों को न्याय दिलाने में वकीलों की भूमिका महत्वपूर्ण

डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने जिला न्यायालय में किया अधिवक्ता कक्ष का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम राजधानी रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में अधिवक्ता कक्ष का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में जिला अधिवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री को अधिवक्ता संघ का आजीवन संरक्षक घोषित किया। मुख्य अतिथि की आसंदी से लोकार्पण समारोह में डॉ. रमन सिंह ने समस्त अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को नए कैलेण्डर वर्ष 2017 की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने जिला अधिवक्ता संघ द्वारा प्रकाशित पत्रिका अधिवक्ता वाणी का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्बोधित करते हुए कहा-समाज के कमजोर वर्गों को जल्द से जल्द निष्पक्ष और सस्ता न्याय मिले, यह राज्य सरकार की भी मंशा है। पीड़ितों को कानूनी सहायता और न्याय दिलाने में वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण को सोलह वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इस अवधि में आधारभूत संरचना में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। जिला और सत्र न्यायालय में सर्वसुविधा युक्त नये अधिवक्ता कक्ष में करीब 1200 अधिवक्ताओं के बैठने की व्यवस्था है। इससे अधिवक्ताओं के साथ-साथ उनके पक्षकारों को अच्छी सुविधा मिलेगी। उन्हें काम करने के लिए अच्छा वातावरण मिलेगा।




मुख्यमंत्री ने कहा - वकीलों की समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रायपुर जिला अधिवक्ता संघ के ग्रीष्मकालीन खेल प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री आर.के. राठी और पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री देवजी भाई पटेल ने भी लोगों को सम्बोधित किया। इस अवसर पर आयोजकों ने मुख्यमंत्री सहित समस्त अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी प्रदान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे।




Aug 31, 2016

2013 पीएससी परीक्षा पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

The Petitioners have fought a long drawn out battle. It is only because of the persistence and tenacity of the Petitioners, especially Ku. Varsha Dongre that these irregularities, acts of corruption, nepotism, favourtism etc. have been brought out. Therefore, Chhattisgarh Public Service Commission is burdened with costs of Rs.5,00,000/- in the writ petition of Petitioner Ku. Varsha Dongre, which shall be paid to her and Rs. 2,00,000/- in the other writ petition where both the Writ Petitioners will get Rs.1,00,000/- each. Exemplary costs have been awarded because of the totally false stand taken by the Chhattisgarh Public Service Commission earlier and its obstinacy in not correcting the mistakes for which permission was granted to it on its own application by this Court vide order dated 26.10.2007. The costs be paid on or before 31st October, 2016.
कोर्ट ने वर्षा डोंगरे, चमन सिन्‍हा, रविन्‍द्र सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए पीएससी को प्रश्‍न पत्रों को कोर्ट की निगरानी में जांच करने, इसी के आधार पर रिस्केलिंग कर नई मैरिट सूची तैयार कर अभ्यार्थियों का साक्षात्कार लेकर चयन सूची जारी करने का आदेश दिया। इसके साथ ही चयनित होने वाले नए उम्मीदवार को 2003 से वरिष्ठता का लाभ देनें और अपात्र होने वाले चयनित उम्मीदवार को बाहर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पीएससी को सभी कार्रवाई 31 अक्टूबर तक पूरी कर कोर्ट को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। संपूर्ण फैसला आप इस लिंक से पढ़़ सकते हैं -
अन्‍य महत्‍वपूर्ण न्‍याय निर्णयों के लिए यहॉं क्लिक करें




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