Nov 27, 2007

अब वकील भी दे सकेंगे वेबसाईट पर विज्ञापन

वकीलों की अधिमान्‍यता की स्‍वीकृति देनें वाले बार कांउंसिल आफ इंडिया नें वकीलों के लिए वेब साईट में विज्ञापन देने की स्‍वीकृति के साथ ही विदेशों से विधि व्‍यवसाय के द्वारा सहज धनागमन का रास्‍ता खोल दिया है । कांउंसिल नें वकीलों को अपने स्‍वयं का वेबसाईट लांच करने एवं दूसरों के साईट पर विज्ञापन देने की छूट दी है । इससे वकील अपनी योग्‍यता व कार्यक्षेत्र एवं संपर्क पते की जानकारी लोगों तक पहुचा सकेगें । वकीलों की बहुत दिनों से मांग थी कि विदेश में रहने वाले लोगों को अपने केस की पैरवी एवं अन्‍य मामलों में जब वकील हायर करने की आवश्‍यकता होती है तब ऐसे विज्ञापन वकीलों के लिए एवं क्‍लाईन्‍ट दोनों के लिए श्रेयकर साबित होगा ।

एड्होकेट्स एक्‍ट 1961 के रूल्‍स 36 स्‍पष्‍ट कहता है कि कोई भी वकील अपने आप को विज्ञापित नहीं करेगा ऐसा करना प्रोफेशनल मिसकन्‍डक्‍ट माना जावेगा । विगत 18 नवम्‍बर को बार कांउन्सिल आफ इंडिया की ज्‍वाईंट कंसल्‍टेटिव कांन्‍फ्रेस में वकीलों को वेबसाईट पर विज्ञापन देने संबंधी छूट का रिजालूशन पास कर दिया है । इस संबंध में पत्र के हवाले से बार कांउन्सिल आफ इंडिया के सेक्रेटरी एस.राधाकृष्‍णन नें कहा है कि 'यह फैसला इस संबंध में वकीलों की ओर से काफी समय से की जा रही मांग को देखते हुए लिया गया है । लेकिन वकीलों को इसका इस्‍तेमाल एक सीमा में रहकर ही करना होगा और बार कांउन्सिल आफ इंडिया एवं स्‍टेट बार कांउन्सिल इस पर नजर भी रखेगी ।'
(दैनिक भास्‍कर में प्रकाशित समाचार का रूपांतरण)
मतलब ये कि अब मेरा भी विज्ञापन प्‍लान करना होगा, कुछ ईस तरह -
भारत के तेजी से उभरते राज्‍य छत्‍तीसगढ में उद्योग स्‍थापित करने एवं भूमि संपदा में निवेश करने वाले इच्‍छुक मालदार देशी विदेशी ब्‍लागर्स संपर्क करें :-
संजीव तिवारी
एम.काम., एल एल.बी, डी.बी.एम.
अधिवक्‍ता
सदस्‍य - छ.ग.उच्‍चन्‍यायालय
जिला अधिवक्‍ता संघ, दुर्ग

ई कोर्ट लिनुक्‍स : न्‍यायाधीश महोदय ले रहे हैं कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण

ई कोर्ट प्रोजेक्‍ट के तहत देश की न्‍यायिक प्रणाली को हाई टेक बनाने पर तेजी से अमल शुरू कर दिया गया है । प्रारंभिक चरण में देश के सभी न्‍यायालयों के न्‍यायाधीश महोदय को कम्‍प्‍यूटर के माध्‍यम से काम काज करने का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।

यह प्रशिक्षण प्रतिदिन शाम 5 बजे कोर्ट अवधि के बाद शुरू होती है और शाम 7.00 तक चलती है । 24 सितम्‍बर से शुरू हुई यह ट्रेनिंग लगभग 24 दिसंम्‍बर तक चलेगी । इस दौरान न्‍यायाधीशगणो को लिनुक्‍स पर आधारित साफ्टवेयर, ओपन आफिस के माघ्‍यम से कोर्ट के पत्र, दस्‍तावेजों का डाटा एंट्री के साथ ही इंटरनेट एवं अन्‍य कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है । न्‍यायाधीशो के प्रशिक्षण के बाद दूसरा चरण न्‍यायिक कर्मचारियों को 15 दिन का प्रशिक्षण कम्‍प्‍यूटर के संचालन के संबंध में दिया जायेगा ।

देश के न्‍यायिक प्रणाली को कम्‍प्‍यूटरीकृत करने के उद्देश्‍य से ई कोर्ट कार्यक्रम शुरू किया गया है । इस कार्यक्रम का शुभारंभ 09 जुलाई 2007 को भारत के राष्‍ट्रपति नें विज्ञान भवन नई दिल्‍ली में किया था । इसके तहत देश के 13114 न्‍यायालयों को कम्‍प्‍यूटरीकृत करने के साथ ही उन्‍हें आपस में जोडने की योजना है ताकि फैसलों एवं वादों की जानकारी का आदान प्रदान हो सके ।

यह प्रशिक्षण पूरे देश में एक साथ सभी न्‍यायाधीशों को दी जा रही है इसके लिये न्‍यू होराईजन को प्रशिक्षण के लिए अधिकृत किया गया है । न्‍यू होराईजन का कहना है कि इसका उद्देश्‍य न्‍यायिक प्रक्रिया को आयान, प्रभावी और गुणवत्‍तापूर्ण बनाना है । इससे प्रकरणों का तेजी से निराकरण होगा और लोग इंब्‍रनेट के द्वारा अपने प्रकरणों पेशी तारीखों आदि की जानकारी प्राप्‍त कर सकेगा ।

ई कोर्ट कार्यक्रम के तहत जिला न्‍यायालय के सभी न्‍यायाधीशों को पर्सनल लैपटाप भी उपलब्‍ध कराया गया है जिसमें ही वे प्रशिक्षण ले रहे हैं एवं घर में उस पर प्रेक्टिस कर रहे हैं ।

(समाचार)

Nov 25, 2007

न्‍यायालयीन व्‍ययों में दमदार कटौती : इंग्‍लैण्‍ड

न्‍यायाधीशों का नाम आते ही मन में जो चित परिचित स्‍वरूप हमारे स्‍मृति में आता है वह है उनका काला गाउन और सिर में रखा घुंघराले लहरदार विग में छुपा एक गंभीर चेहरा । न्‍यायाधीशों के इस स्‍वरूप को स्‍थापित करने वाला देश है इंग्‍लैण्‍ड । एक समय में पूरे विश्‍व को अपने उपनिवेश में शामिल करने की अदम्‍य इच्‍छा रखने वाले देश इंग्‍लैण्‍ड की यह परंपरा लगभग लगभग सम्‍पूर्ण विश्‍व नें अपनाया लिया था । हालांकि बहुत सारे देशों नें इस परंपरा को अब समाप्‍त कर दिया है किन्‍तु इंग्‍लैण्‍ड में यह प्रथा आज तक बरकरार है ।

घोडे के बालों से बनने वाले इस विग को न्‍याय भवन में न्‍यायाधीशों को आवश्‍यक रूप से पहनने की परंपरा को अब इंग्‍लैण्‍ड भी वर्ष 2008 से समाप्‍त करने वाला है । इस एक विग का कीमत होती है 800 पाउन्‍ड यानी लगभग 64000 रूपये और इंग्‍लैण्‍ड में कितने न्‍यायाधीश होंगें उतना गुणा कर लेवें, है ना न्‍यायालयीन व्‍ययों में दमदार कटौती ।

इससे घोडे के बालों से विग बनाने वाले व्‍यवसायी बहुत दुखी है वहीं सार्वजनिक तौर पर कुछ भी न बोलने वाले न्‍यायाधीशों को भी दुख हुआ है क्‍योंकि उन्‍हें इस जामे को पहनने के एवज में मोटा भत्‍ता जो मिलता था जिसमें कटैती हो जाने वाली है ।

(दैनिक भास्‍कर में प्रकाशित राजकुमार केसवानी के लेख का रूपांतरण)

My Blog List