न्यायाधीशों का नाम आते ही मन में जो चित परिचित स्वरूप हमारे स्मृति में आता है वह है उनका काला गाउन और सिर में रखा घुंघराले लहरदार विग में छुपा एक गंभीर चेहरा । न्यायाधीशों के इस स्वरूप को स्थापित करने वाला देश है इंग्लैण्ड । एक समय में पूरे विश्व को अपने उपनिवेश में शामिल करने की अदम्य इच्छा रखने वाले देश इंग्लैण्ड की यह परंपरा लगभग लगभग सम्पूर्ण विश्व नें अपनाया लिया था । हालांकि बहुत सारे देशों नें इस परंपरा को अब समाप्त कर दिया है किन्तु इंग्लैण्ड में यह प्रथा आज तक बरकरार है ।
Sunday, November 25, 2007
न्यायालयीन व्ययों में दमदार कटौती : इंग्लैण्ड
घोडे के बालों से बनने वाले इस विग को न्याय भवन में न्यायाधीशों को आवश्यक रूप से पहनने की परंपरा को अब इंग्लैण्ड भी वर्ष 2008 से समाप्त करने वाला है । इस एक विग का कीमत होती है 800 पाउन्ड यानी लगभग 64000 रूपये और इंग्लैण्ड में कितने न्यायाधीश होंगें उतना गुणा कर लेवें, है ना न्यायालयीन व्ययों में दमदार कटौती ।
इससे घोडे के बालों से विग बनाने वाले व्यवसायी बहुत दुखी है वहीं सार्वजनिक तौर पर कुछ भी न बोलने वाले न्यायाधीशों को भी दुख हुआ है क्योंकि उन्हें इस जामे को पहनने के एवज में मोटा भत्ता जो मिलता था जिसमें कटैती हो जाने वाली है ।
(दैनिक भास्कर में प्रकाशित राजकुमार केसवानी के लेख का रूपांतरण)
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न्यायालयीन हलचल
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1 आर्शिवाद:
उस कम्पनी वाले से मिलवाइये। इलाजुलगुर्बा जैसे चिकित्सा ग्रंथो मे घोडे के बालो को बहुत उपयोगी बताया गया है। यह सिर को ठंडा रखता है और यदि जलाये तो मच्छरो को भगाता है। हो सकता है इस आधार पर उसे फिर से काम मिल जाये।
:)
वैसे रोचक जानकारी। धन्यवाद।
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