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Nov 20, 2010

डिफाल्टर और बन गए डॉयरेक्टर

एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने रजिस्टार फर्म एवं सोसाइटी को डिफाल्टर बैंकों से निर्वाचित होकर आए संचालक मंडल के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सिंगल बेंच ने ६ सप्ताह की मोहलत दी है।

छत्‍तीसगढ़ के पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने याचिका दायर कर शिकायत की थी कि रायपुर स्थित ग्रामीण कृषि विकास बैंक के संचालक मंडल में १० ऐसे सदस्यों को शामिल किया गया है जो पात्र ही नहीं हैं। याचिका के अनुसार इन सदस्यों को जिन बैंक के जरिए संचालक मंडल में शामिल किया गया है चुनाव के पूर्व ही इन बेंकों को डिफाल्टर घोषित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण कृषि विकास बैंक के अंतर्गत आने वाले १० बैंकों को डिफाल्टर घोषित किया गया था। इन बैंकों में चुनाव की प्रक्रिया ही की गई है। समितियों में चुनाव के बाद संचालक मंडल के सदस्यों के लिए निर्वाचन किया गया। आश्चर्यजनक ढंग से १० डिफाल्टर बैंक से भी सदस्यों का मनोनयन कर संचालक मंडल में शामिल कर लिया गया है। याचिकाकर्ता ने इस बात की भी जानकारी दी कि रजिस्टार फर्म एवं सोसाइटी में शिकायत के बाद भी अपात्र डॉयरेक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नियमों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया था कि डिफाल्टर बैंक के सदस्य को मनोनीत किए जाने की स्थिति में वे स्वतः अपात्र हो जाएंगे लिहाजा वे सदस्य ही नहीं रह पाएंगे। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के सिंगल बेंच में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रजिस्टार फर्म एवं सोसाइटी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रजिस्टार से पूछा कि डिफाल्टर बैंक से मनोनित होकर आए संचालक मंडल के सदस्यों के खिलाफ क्यों कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट ने रजिस्टार को ऐसे बैंक जो डिफाल्टर हैं व इन बैंकों से जो सदस्य संचालक मंडल में शामिल किए गए हैं इनकी सदस्यता समाप्ति की घोषणा करने के साथ ही कोर्ट को अवगत कराने फरमान जारी किया है। इसके लिए ६ सप्ताह की मोहलत दी है।

Jul 8, 2010

सीएमओ को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

आर्थिक अनियमितता की शिकायत पर मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ लोक आयोग की रिपोर्ट को बिलासपुर हाईकोर्ट ने उचित माना है। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पर रोक लगाने संबंधी याचिका को अस्वीकार कर दिया है। 

डॉ.आरएन नेताम राजनांदगांव में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे। उनके खिलाफ जिले में दवा व उपकरण खरीदी में आर्थिक अनियमितता करने की शिकायत की गई। शासन ने जांच के लिए शिकायत को छत्तीसगढ़ लोक आयोग भेजा। लोक आयोग ने १ फरवरी २०१० को अपनी जांच रिपोर्ट इस अनुशंसा के साथ सौंपा कि शासन सीएमओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करे। रिपोर्ट आने के बाद डॉ.नेताम को सीएमओ के पद से हटाकर मुख्यालय में पदस्थ किया गया। आयोग की रिपोर्ट पर रोक लगाने डॉ.नेताम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें लोक आयोग की रिपोर्ट पर रोक लगाने की मांग की गई। लाखों के इस आर्थिक अनियमितता से जुड़े प्रकरण की जस्टिस एमएम श्रीवास्तव की एकलपीठ में सुनवाई हुई। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता किशोर भादुड़ी तथा लोक आयोग की ओर से सुमेश बजाज ने तर्क प्रस्तुत किया। आयोग की रिपोर्ट पर रोक नहीं लगाने तर्क दिया गया। लंबी बहस के बाद एकलपीठ ने सीएमओ को अंतरिम राहत उपलब्ध कराने संबंधी आवेदन को अस्वीकार कर आयोग की रिपोर्ट को उचित ठहराया है।बिलासपुर। सेवानिवृत्त कांकेर सीएमओ की पेंशन राशि से १० प्रतिशत की कटौती करने संबंधी शासन के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।


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Jul 3, 2010

रोके गए परिणाम जारी करने का आदेश : हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

दंत चिकित्सक की संविदा नियुक्ति तिथि को आगे बढ़ाने संबंधी आवेदन पर विचार नहीं कर नई नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित किए जाने के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग ने १६ नवंबर २००३ की अनुमति के आधार पर मार्च को डॉ. कमल किशोर राय की संविदा नियुक्ति २ वर्ष के लिए की थी। इस बीच राज्य शासन ने संविदा भर्ती नियम २००४ बनाया। इधर, दंत चिकित्सक डॉ. राय को २२ दिसंबर २००४ को पुनः संविदा नियुक्ति दी गई। २००१ से ५ मई २०१० तक उनकी संविदा नियुक्ति को बढ़ाई गई। सेवा अवधि पूर्ण होने से पहले उन्होंने २० अप्रैल २०१० को संविदा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। इस पर विचार किए बिना राज्य शासन ने ११ जून २०१० को दंत चिकित्सक के पदों में संविदा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया। इसमें डॉ. राय के धारित पद को भी शामिल किया गया। उक्त भर्ती प्रक्रिया में उम्र सीमा ३५ वर्ष तथा संविदा में कार्यरत्‌ अनुभव रखने वालों को चयन में प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान रखा गया। डॉ. राय ने ९ वर्ष तक संविदा में सेवा देने के बाद निर्धारित आयु सीमा को पार कर लिया है। विज्ञापन से व्यथित होकर उन्होंने अधिवक्ता जितेंद्र पाली, वरुण शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश की। इसमें कहा गया कि स्थापित सिद्धांत है कि संविदा में कार्यरत्‌ कर्मचारी को नियमित नियुक्ति द्वारा ही हटाया जा सकता है। इस पद में किसी अन्य कर्मचारी की संविदा नियुक्ति नहीं की जा सकती। याचिका पर जस्टिस एमएम श्रीवास्तव की एकलपीठ में सुनवाई हुई। पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर शासन को नोटिस जारी कर ४ सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

Jun 29, 2010

जगदलपुर नगर निगम को नोटिस : छग पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने लगाई याचिका

जगदलपुर नगर निगम द्वारा ६१ लाख रुपए संपत्ति कर लगाने के खिलाफ छत्तीसगढ़ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नगर निगम ने १५ दिसंबर २०० को एक आदेश जारी कर छत्तीसगढ़ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को वर्ष २००२ से २०१० तक संपत्ति कर की अंतर राशि करीब ६१ लाख रुपए जमा करने कहा था। इसके खिलाफ छत्तीसगढ़ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने अधिवक्ता यशवंत तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन ने संशोधन एक्ट लाया है, जिसमें धारा १३५ के अंतर्गत विहित संपत्ति कर की अधिकतम सीमा को १० से बढ़ाकर २० प्रतिशत किया गया है। स्थानीय शासन के अंकेक्षण ने भी संपत्ति कर की अधिक वसूली पर आपत्ति जताई है। इसके बाद भी नगर निगम ने वर्ष २००२ से २०१० तक बढ़े दर से कर जमा करने का आदेश कंपनी को दिया है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस एसके अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में हुई। उन्होंने नगर निगम जगदलपुर एवं राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यहां उल्लेखनीय है कि जनवरी में नई परिषद के अस्तित्व में आने से पहले ही नगर निगम प्रशासन ने संपत्ति कर की अंतर राशि ६१ लाख रूपए जमा करने का आदेश दिया था। नई परिषद ने अपने पहले बजट में नगरीय प्रशासन विभाग के पत्र के आधार पर समेकित कर बढ़ाने का निर्णय लिया था।

Jun 28, 2010

मानवाधिकार हनन पर हाईकोर्ट ने लिया एक्शन

बडे अफसरों को अदालती नोटिस

पुलिस द्वारा थाने में बंदी के खिलाफ मानव अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित एक प्रकरण मे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जस्टिस सतीश अग्निहोत्री के एकल बेंच ने दुर्ग कलेक्टर ठाकुर रामसिंह पूर्व पुलिस अधीक्षक दीपांशु काबरा सहित कुल 19 प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। जिनमें नगर पुलिस अधीक्षक पहाड़े, नगर निरीक्षक दल्लीराजहरा केपी मरकाम नगर निरीक्षक डौण्डी एमआर नायक एवं अन्य पुलिस अधिकारी एवं सिपाही भी शामिल है। प्रकरण की अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की गई है।

उक्त जानकारी प्रदान करते हुए एक विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ संग्राम परिषद के संगठन सचिव अधिवक्ता राजकुमार गुप्त ने कहा है कि अगस्त 09 को डौण्डी एवं दल्लीराजहरा थाना की पुलिस द्वारा वन विभाग के विश्राम गृह में जुआ खेलते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिसमें भाजपा नेता कौशलेन्द्र झा का पुत्र मनीष झा भी शामिल था। बाद में सभी आरोपियों को दल्ली राजहरा थाना लाकर उन्हें अर्धनग्न करके कतार में खड़ा करके दोनों थानों के नगर निरीक्षकों ने उनके साथ फोटो खिचायी थी। इस कामयाबी के रूप में प्रचारित करने में भी विभिन्न उपक्रम किे गए थे। छत्तीसगढ़ संग्राम परिषद ने इसकी निन्दा करते हुए उसे नागरिक की निजत और मानव अधिकारों का हनन बताया था और इसे सक्षम न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की थी।

बताया गया है कि परिषद की पहल पर प्रमुख याचिकाकर्ता मनीष झा सहित 7 याचिकाकर्ताओं की ओर से उच्च न्यायालय में इसे संविधान उल्लंघन का मामला मानते हुए याचिका पेश की गई है। जिसकी प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय का उल्लंघन मानते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार किया है और राज्य शासन पुलिस महानिदेशक सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने की निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट अधिवक्ता सत्येन्द्र साहू ने पैरवी की। राज्य शासन का प्रतिनिधित्व पेनल अधिवक्ता एनएन राय ने किया।

Jun 27, 2010

मल्हार के अपहरणकर्ताओं की जमानत नामंजूर

बिलासपुर हाईकोर्ट ने ग्रामीण को अगवा कर बिल्हा ले जाने व मारपीट करने के आरोपियों की अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। आरोपियों के खिलाफ मल्हार पुलिस चौकी में जुर्म दर्ज किया गया है।

मस्तूरी थाना क्षेत्र के मल्हार निवासी भागवत प्रसाद पिता गोकुल प्रसाद के घर १ मई २०१० की तड़के ४ बजे चैतुराम यादव व अरविंद शर्मा आए। दोनों ने घर के अंदर बलपूर्वक प्रवेश किया। फिर मारपीट करने के बाद भागवत को मोटरसाइकिल में बैठाकर बिल्हा निवासी संतोष अग्रवाल के घर ले गए। उसके साथ संतोष अग्रवाल ने भी मारपीट की और उसे अपनी दुकान में बंद कर दिया था। बीते २० मई को उसे छोड़ा गया। वहां से मुक्त होने के बाद इस दिन की शाम अपने घर पहुंचा। २१ मई को उसने अपहरण की रिपोर्ट मल्हार पुलिस चौकी लिखाई। इस पर चौकी प्रभारी ने आरोपी चैतुराम यादव, अरविंद शर्मा व संतोष अग्रवाल के खिलाफ धारा ३४१, ३४२, २९४, ३२३, ५०६ बी, ३६४, ३४ के तहत जुर्म दर्ज किया। अपराध पंजीबद्ध होने के बाद आरोपी संतोष व अरविंद ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगाया। वहां से जमानत नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी लगाई गई। इस पर शुक्रवार को जस्टिस टीपी शर्मा की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। उन्होंने अपराध को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।

Jun 26, 2010

बिलासपुर डीएवी स्कूल की याचिका निराकृत

बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्व.श्रीमती बेलादेवी मेमोरियल चेरेटिबल सोसायटी द्वारा अनुबंध समाप्त करने को चुनौती देने वाली डीएवी स्कूल की याचिका सुनवाई के बाद निराकृत कर दिया है। जस्टिस धीरेन्द्र मिश्रा की एकलपीठ ने जिला न्यायालय को एक माह के भीतर मामले का निराकरण करने का निर्देश जारी किया है।

सूत्रों के अनुसार स्व.श्रीमती बेलादेवी मेमोरियल चेरेटिबल सोसायटी एवं डीएवी कालेज ट्रस्ट व मेनेजमेंट सोसायटी के बीच 2001 में अनुबंध हुआ था। अनुबंध के अनुसार आरएसबी कंपाउण्ड सरकंडा में डीएव्ही स्कूल का संचालन हो रहा था। इस बीच स्व.बेलादेवी मेमोरियल चेरेटिबल सोसायटी ने डीएवी से कक्षाएं बढ़ाने का आग्रह किया। कक्षाएं नहीं बढ़ाए जाने पर स्व.बेलादेवी चेरेटिबल सोसायटी ने 13 जून 2009 को डीएवी स्कूल को नोटिस जारी कर 31 मार्च 2010 तक स्कूल बंद करने की बात कही। डीएवी स्कूल ने नोटिस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस पर स्व.बेलादेवी चेरेटिबल सोसायटी ने हुए अनुबंध को निरस्त करते हुए स्कूल बंद कर मार्डन एजुकेशन एकेडेमी नाम से अपना स्कूल शुरू कर दिया। इस पर डीएव्ही स्कूल ने अंतरिम राहत के लिए जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया। जिला न्यायालय द्वारा आवेदन खारिज होने पर डीएव्ही स्कूल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जस्टिस धीरेन्द्र मिश्रा की एकलपीठ ने प्रकरण की सुनवाई के बाद याचिका को निराकृत करते हुए जिला न्यायालय को एक माह के भीतर मामले का निराकरण करने का निर्देश जारी किया है।

Jun 25, 2010

छात्रा को डीएड में प्रवेश देने का आदेश

बिलासपुर हाईकोर्ट नें प्रवेश दिए जाने के बाद संस्थान से बाहर किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर छात्रा को डीएड में प्रवेश देने का आदेश दिया है।

दुर्ग जिले के ग्राम खैरवार बाजार निवासी कुमारी हीना पिता सुधीर कुमार (१९) वर्ष २००९ डीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई थी। जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान नगरी सिहावा में काउंसिलिंग के लिए उसका चयन हुआ। समय पर कॉल लेटर नहीं मिलने से वह काउंसिलिंग के दूसरे दिन कॉलेज में उपस्थित हुई। संस्थान के प्राचार्य ने फीस लेकर उसे प्रवेश दे दिया। इसके बाद प्राचार्य ने १९ अगस्त २००९ को उच्च अधिकारियों से दिशा-निर्देश नहीं मिलने का हवाला देते हुए उसके प्रवेश को रद्द कर दिया।

इस पर छात्रा ने अधिवक्ता टीके तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं प्राचार्य को पक्षकार बनाया गया। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर उत्तरवादियों से जवाब मांगा था। बुधवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस एसके अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हईकोर्ट ने छात्रा को डीएड में प्रवेश देने का आदेश दिया है।

अपहरणकर्ताओं की अग्रिम जमानत खारिज

जुआ खेलने के लिए उधार में दी गई रकम वसूलने के लिए अपहरण और मारपीट करने वाले आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मामला छत्‍तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे क्षेत्र का है। रेलवे परिक्षेत्र निवासी महावीर राजपूत ने अपने वकील के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि वह शहर के ही किसी इलाके में जुआ खेल रहा था। इस दौरान ३० हजार रूपए हारने के बाद कपिल त्रिपाठी से उसने १७ हजार रूपए उधार लिया और एक बार फिर जुआ खेलने बैठ गया। इसकी वसूली के लिए कपिल, शरद त्रिपाठी व तीन अन्य लोगों ने रेलवे परिक्षेत्र से उसका अपहरण कर लिया और व्यापार विहार के एक सूने मकान में ले जाकर नजरबंद कर दिया। 

वहां उधार चुकता नहीं किए जाने की बात कहते हुए उसके साथ जमकर मारपीट की गई। इसके बाद सूने मकान में नोटरी को लेकर आए और ५० रूपए के स्टाम्प पर जबरिया उससे इकरारनामा पर हस्ताक्षर करा लिया। इसमें जुए के लिए ली गई उधार की रकम को १० फीसदी ब्याज के साथ चुकाने की बात लिखी गई है। अपहरण व मारपीट की शिकायत पर तोरवा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धारा ३६६, ३८४, ५०६, ३४ व ३२३ के तहत जुर्म दर्ज कर निचली अदालत में चालान पेश किया था। निचली अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अपहरण के आरोपियों ने अपने वकील के जरिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस टीपी शर्मा की सिंगल बेंच में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस श्री शर्मा ने अपहरण और मारपीट के आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

Jun 22, 2010

यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

छग ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन रायपुर के पदाधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। एसोसिएशन के पदाधिकारी हीरानंद व अमर पंजवानी के खिलाफ आर्थिक अनियमितता की शिकायत रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसाइटी से की गई थी। रजिस्ट्रार ने इस पर जांच के निर्देश दिए थे। रजिस्ट्रार के आदेश को पदाधिकारियों ने अपीलीय अधिकरण के यहां चुनौती दी थी, जहां अपील खारिज कर दी गई थी। इसे पदाधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में हुई। उन्होंने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

पादरी की पिटाई के मामले में ६ को हाईकोर्ट का नोटिस

छत्‍तीसगढ़ के अम्बिकापुर के सरगवां में पदस्थ एक पादरी ने पुलिस पर अपहरण और पिटाई करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने थाना प्रभारी सहित ६ अन्य लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अंबिकापुर के सरगवां स्थित जय ज्योति साधना केंद्र में पदस्थ पादरी सुमन खाका का तबादला यहां के बिशप ने वाड्रफनगर कर दिया था। इसके बाद भी श्री खाका साधना केंद्र में ही अपनी सेवाएं दे रहे थे। विवाद की स्थिति निर्मित होने पर साधना केंद्र के संचालकों ने पुलिस व स्थानीय प्रशासन से शिकायत की थी। साथ ही विवाद बढ़ने की जानकारी भी दी थी। झगड़े की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने श्री खाका को स्थानांतरित जगह पर जाने का फरमान जारी किया था। इसके बाद भी वे वहीं जमे रहे। याचिकाकर्ता श्री खाका ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि साधना केंद्र से नहीं जाने पर एक दिन स्थानीय पुलिस आई और बलात उसे वाहन में बैठाकर ले गई। वाड्रफनगर ले जाकर एक कमरे में बंद कर उसकी जमकर पिटाई की गई। इसकी जानकारी नयापारा के बिशप को होने पर अंबिकापुर थाने में शिकायत की गई। इस पर याचिकाकर्ता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मामले की सुनवाई सोमवार को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में हुई। हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी सहित ६ अन्य लोगों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

Jun 20, 2010

नौकरी व बर्खास्तगी आदेश साथ-साथ

बिलासपुर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अपनी तरह का एक अलग ही मामला सामने आया। हाईकोर्ट के आदेश पर सीएमओ ने याचिकाकर्ता को नियुक्ति और बर्खास्तगी दोनों आदेश एक साथ जारी कर दिया। इससे परेशान याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। प्रकरण की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव सहित आला अफसरों को नोटिस जारी किया है।

मामला महासमुंद जिले के पाटसेंटरी का है। राज्य शासन द्वारा संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोमल प्रसाद नायक को २ जुलाई सन्‌ २००८ में फार्मासिस्ट ग्रेड-२ के पद पर नियुक्ति दी गई थी। महासमुंद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने फार्मासिस्ट पर पूरक और वार्षिक परीक्षा के अंकों को एक साथ जोड़कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए नियुक्ति निरस्त करने संबंधी आदेश जारी कर दिया। इसे याचिकाकर्ता कोमल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम की समूची जानकारी सूचीबद्ध कर सीएमओ के सामने पेश की गई थी। इसमें परीक्षा के परिणाम को ही शामिल किया गया था। मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए सीएमओ द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही सीएमओ को नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देने का आदेश दिया था। इसके एक सप्ताह के बाद सीएमओ ने फौरीतौर पर कार्रवाई करते हुए याचिकाकर्ता को फार्मासिस्ट ग्रेड-२ के पद पर सशर्त नियुक्ति दे दी। जारी नियुक्ति पत्र में सीएमओ ने बड़ी चालाकी के साथ उनकी बर्खास्तगी का रास्ता भी तय कर दिया। दरअसल, इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति एक माह के भीतर स्वमेव समाप्त हो जाएगी। सीएमओ की इस तरह की कार्रवाई की शिकायत करते हुए याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सीएमओ द्वारा उसे जबरिया परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी इस तरह की कार्रवाई से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में हुई। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, महासमुंद कलेक्टर, सीएमओ को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

Apr 2, 2010

सब-इंजीनियर सुरेंद्र कुमार रावत की याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सचिव से मांगा जवाब

बिलासपुर हाईकोर्ट मे लोक निर्माण विभाग के एक सब-इंजीनियर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पीडब्लयूडी सचिव के अलावा चीफ इंजीनियर व अधीक्षण यंत्री को नोटिस जारी किया है।

लोक निर्माण विभाग में पदस्थ सब-इंजीनियर सुरेंद्र कुमार रावत ने वकील मतीन सिद्दीकी के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरडीए) के तहत 25 फरवरी 2002 को ओवरसीयर के पद पर उनकी नियुक्ति की गई थी। उनके कार्यों को देखते हुए विभाग ने सुप्रीटेंडेंट बीआर-2 के पद पर उनकी पदोन्नति कर दी। इसी बीच लोक निर्माण विभाग ने सब-इंजीनियर के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। पीडब्ल्यूडी द्वारा जारी किए गए विज्ञापन के अनुसार इस पद के लिए उसने भी आवेदन जमा किया था। विभाग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद बीआरडीए के विभागीय अधिकारियों के समक्ष आवेदन पेश कर लोक निर्माण विभाग में सब-इंजीनियर के पद पर ज्वाइनिंग के लिए अनुमति मांगी गई। 

याचिका के अनुसार विभाग ने सशर्त अनुमति देते हुए 15 दिनों के भीतर छग शासन के लोक निर्माण विभाग में ज्वाइनिंग करने कहा गया। निर्धारित अवधि में पदभार ग्रहण नहीं करने की स्थिति में वापस मूल विभाग में लौटने की बाध्यता रख दी गई। विभाग से मिले निर्देश के बाद निर्धारित अवधि के पहले ही बतौर सब-इंजीनियर लोक निर्माण विभाग में ज्वाइनिंग दे दी गई। याचिका के अनुसार पदभार ग्रहण करने के बाद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों के समक्ष आवेदन पेश कर बीआरडीए में लंबे समय से कार्य करने का हवाला देते हुए वरिष्ठता देने की मांग की गई थी। लगातार अभ्यावेदन पेश करने के बाद भी विभाग द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर उसने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। जस्टिस श्री अग्निहोत्री ने सचिव पीडब्लयूडी, चीफ इंजीनियर व अधीक्षण यंत्री के अलावा बीआरडीए के मार्फत सीपीडब्लयूडी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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