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Aug 30, 2011

कमल विहार योजना के अंतर्गत याचिकाकर्ताओ की भूमि पर उच्‍च न्‍यायालय का पहला स्‍थगन

याचिकाकर्ता राजेन्‍द्र शंकर शुक्‍ला व अन्‍य की निजी भूमि ग्राम डूमरतराई रायपुर में स्थित है। राज्‍य शासन ने वर्ष 2008 में कमल विहार इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम से एक योजना बनाई जिसमें कुल 416 एकड़ भूमि पर विकास कर एक छोटी टाउनशिप बनाई जानी थी। उक्‍त योजना को राज्‍य सरकार से अनुमति मिल गई थी। वर्ष 2009 में रायपुर विकास प्राधिकरण आरडीए के कहने पर उक्‍त योजना का आकार बढ़ाकर 2300 एकड़ कर दिया गया तथा इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी गई । उक्‍त अधिसूचना के द्वारा दावाआपत्ति मंगवाई गई जिसमें याचिकाकर्ता समेत लगभग 2500 लोगों ने उक्‍त योजना के विरोध में आपत्ति दर्ज करवाई। इसी दौरान जून 2010 में आरडीए ने बैठक कर उक्‍त योजना को अंतिम रूप दे दिया तथा उक्‍त योजना जोकि एक छोटी योजना होनी थी उसे कमल विहार नगर विकास योजना का रूप दे दिया। उक्‍त योजना छग नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधानों के विपरीत होने से याचिकाकर्ता तथा अन्‍य प्रभावित लोगों ने अपने अपने स्‍तर पर विरोध दर्ज कराया। उक्‍त योजना की सबसे बड़ी खामी यह थी कि संबंधित ग्राम पंचायतों तथा नगर निगम से जोनल प्‍लान मंगाए बिना ही नगर विकास योजना को लागू कर दिया गया है जोकि अवैध है। 




राज्‍य शासन ने आपत्तियों की सुनवाई किए बगैर आनन फानन में अधिसूचना जारी करते हुए योजना के क्रियान्‍वयन हेतु निविदाएं आमंत्रित करना आरंभ कर दिया। याचिकाकर्ताओं द्वारा बताया गया है कि राज्‍य शासन के व्‍यवहार से क्षुब्‍ध याचिकाकर्ताओं ने वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता श्री कनक तिवारी के माध्‍यम से माननीय उच्‍च न्‍यायालय बिलासपुर में पी.सैम कोशी, जितेन्‍द्र पाली तथा वरुण शर्मा के द्वारा याचिका प्रस्‍तुत की। उक्‍त याचिका की प्रारंभिक सुनवाइयों में उच्‍च न्‍यायालय ने राज्‍य शासन, आरडीए तथा संबंधित ग्राम पंचायतों को प्रतिउत्‍तर प्रस्‍तुत करने हेतु समय दिया परंतु 4 माह से अधिक का समय बीतने पर भी राज्‍य शासन तथा आरडीए की ओर से कोई उत्‍तर प्रस्‍तुत नहीं किया गया। 




सुनवाई की तारीख आने पर आरडीए द्वारा आनन फानन में अन्‍य याचिका में प्रस्‍तुत जवाब को अपनाने संबंधी आवेदन दिया गया। राज्‍य शासन द्वारा जवाब प्रस्‍तुत करने हेतु अवसर की मांग की गई तथा बताया गया कि केवल अधोसंरचनात्‍मक कार्यों हेतु निविदाएं जारी की गई हैं । याचिका की सुनवाई करते हुए माननीय न्‍यायमूर्ति श्री सतीश अग्निहोत्री जी की एकलपीठ ने बिना विधिक अधिग्रहण किए निजी भूमि पर प्रवेश करना विधिविरुद्ध पाते हुए तथा राज्‍य शासन को य‍ह निर्देश जारी किया है कि याचिकाकर्ताओं की भूमि पर कमल विहार योजना से संबंधित कोई भी निर्माण कार्य भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही किए बिना न किया जाए। 




माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने कमल विहार योजना के विरुद्ध दायर सभी याचिकाओं की सुनवाई की अगली तारीख 21 सितंबर तय की है।

Jun 29, 2010

जगदलपुर नगर निगम को नोटिस : छग पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने लगाई याचिका

जगदलपुर नगर निगम द्वारा ६१ लाख रुपए संपत्ति कर लगाने के खिलाफ छत्तीसगढ़ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नगर निगम ने १५ दिसंबर २०० को एक आदेश जारी कर छत्तीसगढ़ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को वर्ष २००२ से २०१० तक संपत्ति कर की अंतर राशि करीब ६१ लाख रुपए जमा करने कहा था। इसके खिलाफ छत्तीसगढ़ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने अधिवक्ता यशवंत तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन ने संशोधन एक्ट लाया है, जिसमें धारा १३५ के अंतर्गत विहित संपत्ति कर की अधिकतम सीमा को १० से बढ़ाकर २० प्रतिशत किया गया है। स्थानीय शासन के अंकेक्षण ने भी संपत्ति कर की अधिक वसूली पर आपत्ति जताई है। इसके बाद भी नगर निगम ने वर्ष २००२ से २०१० तक बढ़े दर से कर जमा करने का आदेश कंपनी को दिया है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस एसके अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में हुई। उन्होंने नगर निगम जगदलपुर एवं राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यहां उल्लेखनीय है कि जनवरी में नई परिषद के अस्तित्व में आने से पहले ही नगर निगम प्रशासन ने संपत्ति कर की अंतर राशि ६१ लाख रूपए जमा करने का आदेश दिया था। नई परिषद ने अपने पहले बजट में नगरीय प्रशासन विभाग के पत्र के आधार पर समेकित कर बढ़ाने का निर्णय लिया था।

Jun 28, 2010

मानवाधिकार हनन पर हाईकोर्ट ने लिया एक्शन

बडे अफसरों को अदालती नोटिस

पुलिस द्वारा थाने में बंदी के खिलाफ मानव अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित एक प्रकरण मे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जस्टिस सतीश अग्निहोत्री के एकल बेंच ने दुर्ग कलेक्टर ठाकुर रामसिंह पूर्व पुलिस अधीक्षक दीपांशु काबरा सहित कुल 19 प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। जिनमें नगर पुलिस अधीक्षक पहाड़े, नगर निरीक्षक दल्लीराजहरा केपी मरकाम नगर निरीक्षक डौण्डी एमआर नायक एवं अन्य पुलिस अधिकारी एवं सिपाही भी शामिल है। प्रकरण की अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की गई है।

उक्त जानकारी प्रदान करते हुए एक विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ संग्राम परिषद के संगठन सचिव अधिवक्ता राजकुमार गुप्त ने कहा है कि अगस्त 09 को डौण्डी एवं दल्लीराजहरा थाना की पुलिस द्वारा वन विभाग के विश्राम गृह में जुआ खेलते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिसमें भाजपा नेता कौशलेन्द्र झा का पुत्र मनीष झा भी शामिल था। बाद में सभी आरोपियों को दल्ली राजहरा थाना लाकर उन्हें अर्धनग्न करके कतार में खड़ा करके दोनों थानों के नगर निरीक्षकों ने उनके साथ फोटो खिचायी थी। इस कामयाबी के रूप में प्रचारित करने में भी विभिन्न उपक्रम किे गए थे। छत्तीसगढ़ संग्राम परिषद ने इसकी निन्दा करते हुए उसे नागरिक की निजत और मानव अधिकारों का हनन बताया था और इसे सक्षम न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की थी।

बताया गया है कि परिषद की पहल पर प्रमुख याचिकाकर्ता मनीष झा सहित 7 याचिकाकर्ताओं की ओर से उच्च न्यायालय में इसे संविधान उल्लंघन का मामला मानते हुए याचिका पेश की गई है। जिसकी प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय का उल्लंघन मानते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार किया है और राज्य शासन पुलिस महानिदेशक सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने की निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट अधिवक्ता सत्येन्द्र साहू ने पैरवी की। राज्य शासन का प्रतिनिधित्व पेनल अधिवक्ता एनएन राय ने किया।

Jun 25, 2010

छात्रा को डीएड में प्रवेश देने का आदेश

बिलासपुर हाईकोर्ट नें प्रवेश दिए जाने के बाद संस्थान से बाहर किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर छात्रा को डीएड में प्रवेश देने का आदेश दिया है।

दुर्ग जिले के ग्राम खैरवार बाजार निवासी कुमारी हीना पिता सुधीर कुमार (१९) वर्ष २००९ डीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई थी। जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान नगरी सिहावा में काउंसिलिंग के लिए उसका चयन हुआ। समय पर कॉल लेटर नहीं मिलने से वह काउंसिलिंग के दूसरे दिन कॉलेज में उपस्थित हुई। संस्थान के प्राचार्य ने फीस लेकर उसे प्रवेश दे दिया। इसके बाद प्राचार्य ने १९ अगस्त २००९ को उच्च अधिकारियों से दिशा-निर्देश नहीं मिलने का हवाला देते हुए उसके प्रवेश को रद्द कर दिया।

इस पर छात्रा ने अधिवक्ता टीके तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं प्राचार्य को पक्षकार बनाया गया। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर उत्तरवादियों से जवाब मांगा था। बुधवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस एसके अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हईकोर्ट ने छात्रा को डीएड में प्रवेश देने का आदेश दिया है।

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