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Jul 8, 2010

६२ वर्ष में सेवानिवृत्त आदेश निरस्त : जल संसाधन विभाग के गेंगमैनों का मामला

बिलासपुर हाईकोर्ट की डिविजन बैंच ने जलसंसाधन विभाग के गेंगमैनों के ६२ वर्ष में सेवानिवृत्ति के आदेश को खारिज कर दिया है। एकल बैंच के निर्णय पर शासन की अपील के बाद हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है।

दुर्ग निवासी केसराम पटेल ने वर्ष २००८ में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा कि वह जल संसाधन विभाग दुर्ग में स्थाई गेंगमैन है। उसने ६० के बजाय ६२ वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने की मांग की। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद उसे स्थाई गेंगमैन मानते हुए ६२ वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने का आदेश पारित किया। इसके बाद जल संसाधन विभाग के कई गेंगमैनों ने ६२ वर्ष की आयु में रिटायर करने के लिए आवेदन लगाया। एकलपीठ के इस आदेश के खिलाफ शासन ने हाईकोर्ट की युगलपीठ में अपील की। इसमें बताया गया कि केसराम पटेल कभी भी जल संसाधन विभाग में स्थाई गेंगमैन नहीं रहा। वह दैनिक वेतनभोगी के रूप में लेबर का काम कर रहा था। जस्टिस आईएम कुद्दुसी एवं जस्टिस प्रशांत मिश्रा की युगलपीठ ने शासन के तर्क से सहमत होते हुए एकलपीठ के आदेश को खारिज कर दिया। अगली सुनवाई के लिए प्रकरण को फिर से एकलपीठ में भेजा गया है।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शासन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। आदेश को आधार बताते हुए कई अपात्र लोगों ने भी ६२ वर्ष की आयु में रिटायर्ड करने के लिए आवेदन लगा कर इसका लाभ प्राप्त कर लिया है। ज्ञात हो कि स्थाई कर्मचारियों को ग्रेच्युटी एवं पेंशन भुगतान करना होता है।

आरंभ में पढें : -
सृजनगाथा के चौथे आयोजन में ब्‍लॉगर संजीत त्रिपाठी सम्मानित
पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी 'विप्र'

Jun 25, 2010

कलेक्टर को सेवा समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं : शिक्षाकर्मी को करें बहाल

गलत अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के आरोप में सेवा समाप्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मी को सेवा में बहाल करने और रुके हुए वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया है।

दुर्ग जिले के नवागढ़ ब्लॉक के संबलपुर में शिक्षाकर्मी वर्ग ३ के पद पर २० जुलाई २००७ को उत्तर कुमार यादव की नियुक्ति हुई। इसके बाद वह लगातार स्कूल में बच्चों को पढ़ाता रहा। ७ माह बाद १६ फरवरी २००८ को दुर्ग कलेक्टर ने गलत अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर उसकी सेवा समाप्त करने का आदेश दिया। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे सिंगल बेंच ने खरिज कर दिया। इस पर उसने अधिवक्ता दिनेश तिवारी के माध्यम से डिवीजन बेंच में रिट अपील पेश की। इसमें कहा गया कि वह एकल शिक्षक वाले स्कूल में कार्यरत्‌ रहा। वहां उसे रिलीफ करने कोई तैयार नहीं था। इसके कारण अनुभव प्रमाणपत्र में पांच अधिकारियों के हस्ताक्षर कराए गए। उसकी नियुक्ति जनपद पंचायत नवागढ़ ने की है। इस आधार पर कलेक्टर को सेवा समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं है।

जस्टिस आईएम कुद्दुसी एवं जस्टिस प्रशांत मिश्रा की युगलपीठ में बुधवार को अपील पर सुनवाई हुई। उन्होंने याचिकाकर्ता को पुनः बहाल करने तथा रुके हुए वेतन का लाभ देने का आदेश दिया है।

Jun 20, 2010

छग खनिज नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए छग खनिज नियम २००९ को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने खनिज विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिस के बाद नियम को चुनौती दी थी।

मामला राजनादगांव का है। यहां की निवासी व खदान तथा क्रेशर संचालिका पुष्पलता ओसवाल को खनिज विभाग ने छग खनिज नियम २००९ (खनन, परिवहन तथा भंडारण) का हवाला देते हुए खदान के बाहर खनिज का भंडारण और परिवहन करने की स्थिति में लाइसेंस लेने की अनिवार्यता रख दी थी। नोटिस में कहा गया था कि लीज वाली जमीन के बाद परिवहन व भंडारण करने की स्थिति में छग खनिज नियम प्रभावशील होगा। लिहाजा दूसरा लाइसेंस की जरूरत पड़ेगी। खनिज विभाग के नोटिस के बाद याचिकाकर्ता ने नियम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि उसका क्रेशर लीज एरिया में लगा हुआ है। खनिज का भंडारण व परिवहन भी वह लीज सीमा के भीतर ही कर रही है। उसे दूसरी परमिट की जरूरत नहीं है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस आईएम कुद्दुसी व जस्टिस प्रशांत मिश्रा की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने छग खनिज नियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

Apr 18, 2010

पति-पत्नी के विवाद में फंस गए बच्चों को हाईकोर्ट ने दिलाई ममता की छांव

पति-पत्नी के विवाद में फंसे मासूम बच्चों को बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश पर मां मिल गई है। विवाद के बाद पति मासूमों को बलपूर्वक अपने पास ले गया था। छत्‍तीसगढ के रायगढ़ निवासी मनोज यादव का पत्नी शकुन बाई यादव के साथ विवाद हो गया था। इस पर मनोज ने परिवार न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया। उसने वाद में एकता (५) व तुषार यादव (७) वर्षीय मासूम बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए नैचुरल गार्जियनशिप देने की मांग की। परिवार न्यायालय ने दोनों बच्चों को पिता को देने का आदेश दिया। इसके बाद मनोज दोनों बच्चों को अपने साथ ले गया। बच्चों से अलग होने के बाद मां शकुन बाई ने अधिवक्ता निशा व अमित सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश की। इसमें दोनों बच्चों को दिलाने की मांग की गई।

इस पर हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट के आदेश पर मां दोनों बच्चों को अपने पास ले गई थी। इसके बाद पति बलपूर्वक बच्चों को फिर से अपने साथ ले गया। शकुन ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। कोई कार्रवाई नहीं होने पर उसने पुनः हाईकोर्ट में वाद दायर किया। जस्टिस द्रीरेंद्र मिश्रा एवं जस्टिस प्रशांत मिश्रा की डिवीजन बेंच में प्रकरण की सुनवाई हुई। उन्होंने बच्चों के छोटे होने के तर्क को स्वीकार करते हुए दोनों को मां को सौंपने का आदेश दिया। इस प्रकार हाईकोर्ट के आदेश पर मासूम बच्चों को फिर से मां मिल गई है।

Mar 18, 2010

बीमे की रकम नहीं हो सकती कुर्क

रायपुर निवासी तुलसीदेवी अग्रवाल के पुत्र रोहित कुमार का रायगढ़ की फर्म हिंदुस्तान फेब्रिकेशन से व्यापार के सिलसिले में लेनदेन चलता था। इसी बीच उसकी एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। हिंदुस्तान फेब्रिकेशन ने दावा किया कि उसे रोहित से 9 लाख 69 हजार 758 रुपए लेने हैं। उसने रोहित की जीवन बीमा पालिसी में से क्लेम की राशि का भुगतान करने की मांग करते हुए रायगढ़ के सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। इसमें कहा गया था कि मृतक की बीमा पालिसी में से उसकी मां को जो भुगतान किया जा रहा है, वह उन्हें न दिया जाए। बल्कि यह रकम उनके पक्ष में जारी की जाए। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जीवन बीमा की रकम को कुर्क या जब्त नहीं किया जा सकता। जस्टिस प्रशांत मिश्रा की सिंगल बेंच ने इस संबंध में दिए गए जिला न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।

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