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Apr 20, 2010

कानून में सभी बराबर

सहायता सामाजिक संस्था हाउसिंग बोर्ड ने वार्ड 23 शारदा पारा कैंप-2 में छत्तीसगढ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सौजन्य से विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया।

प्रथम श्रेणी न्यायाधीश छाया सिंह ने लोगों को कानून के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कभी भी सादे कागज पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए। छोटे-मोटे झगड़ों में थाने में जाकर रिपोर्ट नहीं करना चाहिए। पर्याप्त कारण के बाद भी थाने में रिपोर्ट नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली जा सकती है। न्यायालय का खर्च उठाने में असमर्थ व्यक्ति विधिक सेवा प्राधिकरण में सादे कागज में आवेदन कर निशुल्क सेवाएं प्राप्त कर सकता है। पुलिस किसी की भी बिना वारंट या ठोस कारण के गिरफ्तार नहीं कर सकती है। महिलाओं को पुलिस सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार नहीं कर सकती है। महिलाओं की गिरफ्तारी के लिए महिला पुलिस का होना जरूरी है। उन्होंने विभिन्न धाराओं के बारे में भी जानकारी दी। अधिवक्ता सरोज सिंह ने महिलाओं के अधिकार एवं कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पत्नी के रहते हुए यदि दूसरा विवाह करना अवैध है। इसके लिए कानून में कड़े दंड का प्रावधान है। वार्ड 23 की पार्षद रामबाई वर्मा ने कहा कि वे अपने वार्ड की हर समस्या के निराकरण के लिए प्रयासरत रहती हैं। आगे भी कोई समस्या वार्ड में ही हल की जाएगी। जरूरत पडऩे पर न्यायालय की शरण ली जाएगी। संचालन सचिव दिनेश सिंह एवं आभार प्रदर्शन संस्था अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। इस अवसर पर महिला स्वसहायता समूहों की गीता चौधरी, भुल्लू देवी, उमा देवी, मंजू देवी, मीता, गोमती शुक्ला आदि उपस्थित थीं।

कानून अंधेरे में रोशनी जैसा

छत्तीसगढ के दुर्ग जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन ग्राम खेरधा में किया। मुख्य अतिथि दुर्ग के अतिरिक्त सत्र न्याशधीश पीके एक्का ने कहा कि जैसे अंधेरे में चलने के लिए रौशनी की आवश्यकता होती है, वैसे ही हमारे जीवन मे कानून की जानकारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत माता-पिता अपने बेटे, बेटियों, पोते और पोतियों पर अचल संपत्ति रहने के बाद भी जीवन निर्वाह के लिए आधारित है। रिश्तेदारों द्वारा उनकी देखभाल में कोताही बरती जा रही है या उन्हें घर से बेदखल किया जा रहा है तो परिवार वालों पर कार्रवाई हो सकती है। देखभाल नहीं करने पर तीन माह और बेदखल करने पर तीन हजार रुपए का अर्थदंड और पांच साल की सजा का प्रावधान है।

श्री एक्का ने कहा कि टोनही प्रताडऩा कानून के तहत किसी को टोनही चिन्हांकित करना अपराधिक श्रेणी में माना जाता है। यातायात दुर्घटनाओं से संबंधित जानकारी देते हुए श्री एक्का ने कहा कि अज्ञात वाहन से दुर्घटना होने पर गंभीर चोट लगने पर साढ़े १२ से २५ हजार रुपए तक और मृत्यु होने पर ५० हजार रुपए का मुआवजा दिया जाता है। इसके लिए दुर्घटना दावा अभिकरण बनाए गए हैं। राशि तोषण निधि से दिया जाता है। बगैर बीमा, लाइसेंस या बिना रजिस्ट्रेशन वाहन से दुर्घटना होने पर दुर्घटना दावा क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी वाहन के मालिक की होती है। उन्होंने मौलिक अधिकारों की भी जानकारी दी। विशेष अतिथि प्रथम श्रेणी व्यवहार न्यायाधीश मनीष दुबे ने कहा कि उच्च न्यायालय ने न्यायाधीशों को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है, जिसके तहत विधिक जागरुकता शिविर के माध्यम से कानूनी जानकारियां दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य में चूक होने पर अपराध होते हैं।

न्यायाधीश संतोष ठाकुर ने कहा कि शिविर का एकमात्र उद्देश्य लोगों को कानून के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि श्रमिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का विधिक प्राधिकरण में प्रावधान है। न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने कहा कि सामान्य नागरिकों को विधिक अधिकार का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराध जमानती और गैर जमानती होते हैं। जमानती में पुलिस आरोपी को जमानत में छोड़ सकती है। जबकि गैर जमानती में आरोपी को छोडऩे या रिमांड पर लेने का अधिकार न्यायाधीश के पास सुरक्षित रहता है। चंदन गुप्ता, डा. शोभाराम बंजारे, एम चंद्रशेखर रेड्डी ने भी अपने विचार रखें। कार्यक्रम में जामुल थाना के नगर निरीक्षक अशोक शर्मा, एएसआई वीके मंडलेश, जेएन सिंह, फेकुराम कौशिक, जयराम सिंह, रामनारायण साहू, सुखदेव कामरु, निशा, नवाब अली, कृष्णा निषाद आदि उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन मंगलू राम सिन्हा ने किया।

Apr 1, 2010

हाईकोर्ट में विधिक सेवा अधिकारियों की कार्यशाला

छत्तीसगढ हाईकोर्ट के जस्टिस व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा ने वार्षिक कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यशाला में उक्त बातें कही। हाईकोर्ट के लाइब्रेरी सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने विधिक सेवा अधिकारियों को प्रकरणों के निराकरण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें आम जनता के दुख-दर्द को समझना होगा, तभी विधिक सेवा के कार्यों में गति आएगी। श्री मिश्रा ने अधिकारियों को अति संवेदनशील और सेवाभाव से काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों में राजीनामा के जरिए प्रकरणों के निराकरण में अधिवक्ता अधिक से अधिक सहयोग करें।

सेवाभावी बनें वकील : मिश्रा
जरूरतमंद और पीड़ित लोगों को त्वरित व सुलभ न्याय दिलाने के लिए विधिक सेवा की शुरुआत की गई है। इस कार्य को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए वकीलों का सहयोग आवश्यक है।
जस्टिस मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि गरीब व पिछड़े वर्गों को सहज न्याय दिलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नियम-कानून तैयार कर विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसका दायित्व न्याय पालिका को सौंपा गया है। वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी इसके अध्यक्ष और अन्य न्यायिक अधिकारी सदस्य नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान की सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी अधिवक्ता हैं, जिन्हें वंचित और अभावग्रस्त लोगों को न्याय दिलाने का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा में संलग्न अधिवक्ता पूर्व से ज्यादा जागरूक हुए हैं, यही कारण है कि विधिक सेवा के माध्यम से वे पूर्व वर्ष की तुलना में अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण करने में सक्षम हुए हैं। कार्यशाला को जस्टिस सुनील कुमार सिन्हा सहित अन्य ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर महाधिवक्ता देवराज सुराना, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वीजी तामस्कर, सीनियर एडवोकेट डॉ. निर्मल कुमार शुक्ला, पीकेसी तिवारी, ओमप्रकाश साहू सहित वकील उपस्थित थे। कार्यशाला का संचालन एवं आभार प्रदर्शन विधिक सेवा सहायता समिति के सचिव एएल जोशी ने किया।

Mar 24, 2010

वृहद लोक अदालत में ८७ प्रकरणों का निराकरण

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग (छ.ग.) के अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार पंडा के निर्देशानुसार २१ मार्च को जिला न्यायालय दुर्ग में वृहद लोक अदालत आयोजित की गई। इस लोक अदालत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार पंडा के अदालत में १ क्लेम, २ सिविल, द्वादश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती कांता मार्टिन के अदालत में ५ क्लेम व ३ सिविल, सप्तम अपर जिला न्यायाधीश राजेंद्र प्रधान के अदालत में ९ क्लेम, १ सिविल प्रकरण निपटाए गए।
अष्ठम अपर जिला सत्र न्यायाधीश आर.एल. कुर्रे के अदालत में १० क्लेम, एकादश अपर सत्र न्यायाधीश पी.एस. पैकरा के अदालत में ६ क्लेम, नवम अपर जिला न्यायाधीश वी.के. एक्का के अदालत में २ क्लेम, २ सिविल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार नायडू के अदालत में १० अपराधिक, संतोष ठाकुर जेएमएफसी के अदालत में १ अपराधिक, श्रीमती नीरू सिंह बगेल जेएमएफसी के अदालत में ४ अपराधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसी तरह अभिषेक शर्मा जेएमएफसी के अदालत में २, एल.पी.एस. बघेल जेएमएफसी के अदालत में ६, छाया सिंह बघेल जेएमएफसी के अदालत में १, श्रीमती ममता शुक्ला जेएमएफसी के अदलात में ४, श्रीमती सुषमा लकड़ा जेएमएफसी की अदालत में ३ अपराधिक, रश्मि मंडावी जेएमएफसी के अदालत में २, जितेंद्र कुमार ठाकुर जेएमएफसी के अदालत में २, जितेंद्र कुमार ठाकुर जेएमएफसी के अदालत में २ सिविल, १ अपराधिक तथा डी.के. तिवारी प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय दुर्ग के अदालत में १ वैवाहिक प्रकरण निपटाए गए। इस वृहद लोक अदालत में कुल ३३ क्लेम कुल मुआवजा राशि ३० लाख ४३ हजार रुपए, सिविल प्रकरण कुल १०, इसी प्रकार अपराधिक ४३, वैवाहिक १ प्रकरण का निराकरण किया गया।

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