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Jun 21, 2010

बार की लाइब्रेरी होगी देश में नंबर वन

स्वास्थ्य मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि जिस तरह बोदरी स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भवन देश में नंबर वन पर है, उसी तर्ज पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की लाइब्रेरी को भी अव्वल दर्जे पर रखने जरूरी उपाय किए जाएंगे। इसके लिए फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी।

प्रभारी मंत्री श्री अग्रवाल ने शनिवार को हाईकोर्ट परिसर स्थित हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यालय में बार एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित टेलीफोन डायरेक्ट्री का विमोचन किया। हॉल में आयोजित एक सादे व गरिमामय समारोह में उपस्थित हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, स्टेट बार कौंसिल व जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और वकीलों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बोदरी में करोड़ों रूपए की लागत से बने छग हाईकोर्ट भवन की भव्यता देखते ही बनती है। अपनी भव्यता के चलते यह देश के नंबर वन हाईकोर्ट भवन में शुमार हो गया है। यह हम सबके लिए गौरव की बात है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बोदरी स्थित छग हाईकोर्ट की भव्यता के अनुरूप हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की लाइब्रेरी को भी सर्वसुविधायुक्त बनाने के प्रयास किए जाएंगे। 

लाइब्रेरी में दुनियाभर की लॉ से संबंधित चुनिंदा किताबों का अनूठा संग्रह हो, ऐसा प्रयास किया जाएगा। इसके लिए फंड की कमी नहीं होगी। इसके लिए उन्होंने वकीलों को शासन स्तर पर प्रयास करने का आश्वासन दिया। बोदरी के नए हाईकोर्ट भवन में कामकाज प्रांरभ होने की स्थिति में आने-जाने में होने वाली दिक्कतों का जब वकीलों व पदाधिकारियों ने जिक्र किया, तब वकीलों की परेशानियों को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने आवागमन की दिक्कतों को दूर करने के लिए सिटी बस का संचालन करने की बात कही। श्री अग्रवाल ने बार एसोसिएशन में सुविधा मुहैया कराने के साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव मदद देने की बात कही। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित टेलीफोन डायरेक्ट्री में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति, राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति भवन के नंबर भी दिए गए हैं। न्यायपालिका से जुड़े तमाम नंबर भी डायरेक्ट्री में रिकॉर्ड किए गए हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय विधि मंत्रालय, विधि-विधायी विभाग, हाईकोर्ट के जज, केंद्रीय व राज्य मानवाधिकारी आयोग, जिला कोर्ट के जजों के अलावा स्थानीय प्रिंट, इलेक्‍ट्रानिक मीडिया, हाईकोर्ट, जिला व तहसील कोर्ट के वकीलों, स्टेट बार कौंसिल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन व जिला कोर्ट अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों के मोबाइल व टेलीफोन नंबर शामिल हैं।

कार्यक्रम का संचालन हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव अब्दुल वहाब खान ने किया। इस अवसर पर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बाबा सिंह ठाकुर, शैलेंद्र दुबे, एनएल सोनी, दयराम शर्मा, सुरेश गौतम, हाईकोर्ट तथा जिला कोर्ट अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में वकील उपस्थित थे।

Jan 20, 2010

बिलासपुर हाईकोर्ट का समय फिर साढ़े 10 से कराने की कोशिश

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने वकीलों की समस्याओं के संबंध में चीफ जस्टिस राजीव गुप्ता के नाम पत्र लिखा है। इसमें हाईकोर्ट शुरू होने का समय पहले की तरह ही 10.30 बजे करने सहित कई मांगे की गई हैं। पिछले साल से कोर्ट शुरू होने का समय 10.15 बजे कर दिया गया है।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव अब्दुल वहाब खान ने पत्र में कहा है कि पिछले काफी दिनों से वकीलों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन पर एसोसिएशन की पिछले दिनों हुई बैठक में चर्चा की गई और इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किए गए। कोर्ट का समय 10.15 बजे से शुरू होने के कारण दूर-दराज से वकीलों को पहुंचने में परेशानी हो रही है। पूर्व में जजों की कमी के कारण कोर्ट के कार्यालयीन समय में बढ़ोतरी की गई थी। अब जजों की संख्या बढ़ने के बाद कोर्ट का समय पहले की तरह 10.30 से 4.30 बजे तक किया जाए। दोपहर में भोजन अवकाश का समय कम होने के कारण भी वकीलों को काफी असुविधा हो रही है इसलिए इसे एक घंटे का, डेढ़ से ढाई बजे तक किया जाए।

पत्र में मांग की गई है कि दंड प्रक्रिया संहिता 438 व 439 के आवेदन पत्रों से संबंधित प्रकरणों में जानकारी न होने की स्थिति में डिफाल्ट न लगाया जाए और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत प्रस्तुत आवेदन पत्रों में चालान की संपूर्ण प्रति टाइप सहित प्रस्तुत करने की बाध्यता खत्म की जाए।

इसकी जगह डायरी, रिकार्ड या अभिलेख मंगवाने से वकीलों को सुविधा होगी। पत्र में कहा गया है कि फाइलिंग में ऐसे दस्तावेजों की हाथ से लिखी कापी भी शामिल करने की अनुमति दी जाए जो स्पष्ट तौर पर पढ़े जा सकते हैं। वर्तमान में सभी दस्तावेजों की टाइप की हुई कापी मांगने से समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। आदेश की अस्पष्ट सत्यापित कापी जारी करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

Aug 28, 2009

सीनियर एड्वोकेट्स जूनियरों को गुजारे लायक पैसा अवश्‍य दें

छत्‍तीसगढ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जूनियर वकीलों की हालत सुधारने की दिशा में पहल की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नाम पत्र लिखकर कहा है कि वे अपने जूनियरों को इतनी फीस दें कि ताकि उनको जीवन निर्वाह में कोई कठिनाई न हो।

हाईकोर्ट में जूनियर वकीलों को आमतौर पर काफी संघर्ष करना पड़ता है। अधिकतर कनिष्ठ वकील किसी न किसी सीनियर वकील के अंडर में प्रेक्टिस शुरू करते हैं। इसके पीछे वजह है कि नए वकीलों को हाईकोर्ट में काम करने का न अनुभव होता और न ही उनकी पहचान होती है।

सीनियर के अंडर में रहकर जहां वह कोर्ट में एपीयर होने के तरीके सीखते हैं, वहीं उन्हें याचिका तैयार करने व प्रस्तुत करने की ट्रेनिंग भी मिलती है। इसका फायदा सीनियर एडवोकेट उठाते हैं और कई बार अच्छा काम करने के बाद भी जूनियर को उस अनुपात में मेहनताना नहीं मिल पाता।

इसे ख्याल में रखते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वी.जी .तामस्कर ने एक सरकुलर जारी किया है। इसमें सभी सीनियर एडवोकेट को अपने जूनियर्स का ख्याल रखने की नसीहत दी गई है।

हाईकोर्ट के सभी वरिष्ठ और वरिष्ठतम वकीलों से निवेदन है कि वे अपने अधीन काम करने वाले जूनियर्स को इतनी फीस दें कि वे कम से कम अपने जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी कर सकें।

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