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Nov 14, 2010

भू-विस्थापितों ने नौकरी की मांग को लेकर हाईकोर्ट में लगाई गुहार : एनटीपीसी जीएम को हाईकोर्ट का नोटिस

सीपत स्थित एनटीसीपीसी के लिए जमीन देने वाले भू-विस्थापितों ने वहां नौकरी की मांग को लेकर छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने एनटीपीसी के जीएम, सचिव राजस्व व आपदा प्रबंधन सहित आला अफसरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

ग्राम रांक निवासी जगदीश पुरी व बिसाहु ने वकील मतीन सिद्दीकी के जरिए होईकोर्ट में याचिका दायर कर शिकायत की है कि सीपत एनटीपीसी प्रबंधन ने भू-विस्थापितों के लिए पुनर्वास पैकेज के तहत मुआवजा के साथ ही प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही थी। गांव के अन्य किसानों के समान उनकी भी कृषि योग्य जमीन पावर प्लांट के लिए अधिग्रहित कर ली गई है। जगदीश ने बताया है कि उसकी १.११ एकड़ व बिसाहु की ३.१२ एकड़ जमीन एनटीपीसी प्रबंधन ने अधिग्रहित की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके बेटे प्रमोद कुमार व रोहित खरे को १० मई २००८ को प्रबंधन ने इंटरव्यू के लिए बुलाया था। साक्षात्कार के बाद जारी की गई चयन सूची में उनके नाम भी थे। याचिकाकर्ताओं ने शिकायत करते हुए कहा कि चयन सूची में नाम जारी करने दो साल के बाद भी नौकरी नहीं मिल पाई है। जानकारी मांगने पर संतोषजनक जवाब भी नहीं मिल रहा है। एनटीपीसी प्रबंधन के अड़ियल रवैए की कलेक्टर व एसडीएम से भी की गई थी। कलेक्टर ने पुनर्वास पैकेज के लिए जारी गाइड लाइन के अनुसार नौकरी देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की सिंगल बेंच में हुई। जस्टिस श्री अग्निहोत्री ने सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन,सीपत स्थित एनटीपीसी के जीएम,कलेक्टर व एसडीएम बिलासपुर को नोटिस जारी किया गया है।

प्रबंधन द्वारा पुनर्वास पैकेज का उल्लंघन करने से नाराज प्रभावित भू-विस्थापितों ने ग्राम रांक में चरणबद्ध आंदोलन किया था। इस दौरान प्रभावित सभी ९ गांवों के ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने एनटीपीसी के कुछ अफसरों का घेराव करने के साथ ही चूड़ियां भी पहना दी थी। प्रबंधन द्वारा पुनर्वास पैकेज के तहत प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया था।

Jul 28, 2010

पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार गृह सचिव व डीजीपी से मांगा जवाब

काफिर बताते हुए पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने गृह सचिव, डीजीपी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रकरण रायपुर के वीरगांव का है।

छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गांधीनगर वीरगांव निवासी शादिर बनारसी के खिलाफ यहीं रहने वाले शादिर अंसारी, जमील रजा सहित अन्य ने एक पाम्प्लेट छपवाए, जिसमें यह लिखा था कि यह मुस्लिम सुन्नी धर्म को नहीं मानता, वह वहाबी व काफिर है। इस कारण उसका व उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार करते हुए मस्जिद में नमाज अदा करने पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा उसके बेटी के विवाह के दौरान भी पर्चा बाट कर शादी में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया गया। इस बात की उसने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई। पुलिस सुरक्षा के बीच उसकी बेटी का शादी कराया गया। रिपोर्ट के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे परिवार ने राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत की। शिकायत के बाद भी आयोग से भी न्याय नहीं मिलने पर उसने अधिवक्ता मतीन सिद्दकी, सिद्घार्थ शुक्ला एवं एजीके खोखर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने प्रकरण पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद गृह सचिव, डीजीपी, कलेक्टर रायपुर एवं पुलिस अधीक्षक रायपुर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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