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Jul 9, 2010

अधिवक्ता का भाई और टोनही प्रताड़ना के आरोपी जेल गए

दहेज प्रताड़ना के एक मामले में फरार अधिवक्ता के भाई को गुरुवार को छत्‍तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नेवई पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट वेन्सलास टोप्पो के न्यायालय में पेश किया। जहां से २७ जुलाई तक उसे न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया।
प्रकरण के अनुसार रिसाली भिलाई निवासी अरुणा पति सुधाकर काम्बले (२५) ने महिला थाने में शिकायत की थी कि उसका विवाह ७ सितम्बर २००७ को सुधाकर से हुआ था। दोनों ने प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद उसका पति सुधाकर, सास कुसुम, अधिवक्ता जेठ अनिल जेठानी छाया उसे मायके से ५० हजार रुपए लेकर आने के लिए शारीरिक व मानसिक रुप से प्रताड़ित किया करते थे।
पुलिस ने २१ नवम्बर २००९ को मामले में चारों को आरोपी बनाते हुए उनके विरुद्ध धारा ४९८, ३४ के तहत जुर्म दर्ज किया। इसके बाद से सुधाकर फरार चल रहा था। वहीं सास कुसुम व जेठानी छाया को पुलिस ने ११ जनवरी व अधिवक्ता अनिल काम्बले को ७ अप्रैल को पुलिस ने पकड़कर न्यायालय में पेश किया। जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया था। गुरुवार को सुधाकर को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। जहां से १४ दिन की रिमांड पर उसे जेल भेज दिया गया।

टोनही प्रताड़ना के आरोपी जेल गए

अधेड़ महिला के घर घुसकर उसकी पिटाई करने व उसे टोनही कहकर प्रताड़ित करने के चार आरोपियों को गुरुवार को उसी न्यायालय ने न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट वेंसलास टोप्पो ने यह आदेश जारी किया। प्रकरण के अनुसार बीमलेश्वरी नगर बोरसी निवासी ललिता पति प्यारेलाल साहू (५०) की वहीं के श्रवण यादव, मनोज यादव, चंद्रिका साहू व भरत साहू ने घर में घुसकर बेदम पिटाई कर दी थी। इस दौरान आरोपियों ने ललिता को टोनही कहकर भी शारीरिक व मानसिक रुप से प्रताड़ित किया था। पुलगांव पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध धारा ४५१, २९४, ३२३ व ४, ५ टोनही प्रताड़ना एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए गुरुवार को आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।


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छत्‍तीसगढ़ राज्‍य प्रशासनिक सेवा के एसडीएम नाहटा जमानत पर रिहा

रिश्तव काण्ड में आरोपी बनाए गए छत्‍तीसगढ़ राज्‍य प्रशासनिक सेवा के बालोद में पदस्‍थ एसडीएम जी.सी. नाहटा को गुरुवार को न्यायालय से जमानत मिल गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक पण्डा ने यह आदेश जारी किया। प्रकरण के अनुसार नाहटा ७ मई २०१० को बालोद में ग्राम घुमका निवासी दिलीप सिन्हा से ४० हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए थे। एण्टी करप्शन ब्यूरो की टीम ने उन्हें पकड़ा था। उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। ८ मार्च को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया था। उसके बाद से वे लगातार न्यायिक रिमांड में जेल में निरुद्ध थे। गुरुवार को उनके वकील ने यह कहते हुए उनकी जमानत याचिका लगाई कि प्रकरण के ६० दिन होने के बाद भी पुलिस इस मामले में चालान पेश नहीं कर पाई है। उक्त धारा के अंतर्गत आजीवन कारावास या १० वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति में नाहटा की जमानत याचिका स्वीकार की जा सकती है। इसके बाद न्यायाधीश श्री पण्डा ने उन्हें जमानत दे दी और पुलिस को फटकार लगाई कि वे जल्द से जल्द चालान पेश करे। नाहटा को बेमेतरा निवासी संजय पिता मोती लाल जैन की १५ हजार रुपए व इतने ही मुचलका जमानत में रिहा किया गया।

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Jul 4, 2010

जिला प्रशासन का आवेदन जिला न्यायालय से खारिज : भाटिया ग्रुप को राहत

बिलासपुर जिला सत्र न्यायाधीश ने जिला प्रशासन के उस आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें भाटिया ग्रुप द्वारा संचालित केबल नेटवर्र्क के कंट्रोल रूम को ज्यादा समय तक सील करने की अनुमति मांगी थी। नियम के अनुसार केबल नेटवर्क के कंट्रोल रूम को एसडीएम द्वारा १० दिन से ज्यादा समय के लिए सील नहीं किया जा सकता। इससे ज्यादा समय तक सील करने के लिए जिला जज से अनुमति जरूरी है।

जिला प्रशासन ने जिला सत्र न्यायालय श्रीमती अनिता झा के न्यायालय में आवेदन लगाते हुए कहा था कि मंजीत सिंह भाटिया और साथियों की शिकायत पर सेंडो आइस फैक्ट्री में अवैध रूप से संचालित केबल नेटवर्क के कंट्रोलरूम के उपकरण को जब्त उसे सील कर दिया गया। नियम के अनुसार कंट्रोल रूम को सील करने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति ली जाए, ताकि कंट्रोल रूम को लंबे समय तक के लिए सील किया जा सके। जिला सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता झा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला प्रशासन का आवेदन खारिज कर दिया। जिला सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा है कि शासन को और समय देने का कोई आधार नहीं है। गौरतलब है कि मंजीत सिंह भाटिया और उसके साथियों ने १२ अप्रैल को एसडीएम से शिकायत करते हुए कहा था कि सेंडो आइस फैक्ट्री में अमोलक सिंह भाटिया और उसके सहयोगी अवैधानिक तरीके से टेलीविजन नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। इस शिकायत के आधार पर एसडीएम ने सेंडो आइस फैक्ट्री में छापामार कार्रवाई करते हुए कं ट्रोल रूम को सील कर दिया था और वहां रखे उपकरण की जब्ती बनाई थी।

Jul 2, 2010

हत्याकांड के ७ आरोपियों को आजीवन कारावास

छत्‍तीसगढ़ के दुर्ग जिले के तहसील बेमेतरा में अशोक कुमार साहू एएसजे (एफटीसी) के न्यायालय में बहुचर्चित संबलपुर हत्याकांड का फैसला सुनाया गया। पवन कुमार की हत्या के सभी ७ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। इस मामले में पिछले तीन वर्षों से सुनवाई चल रही थी। घटना के अनुसार २८ अगस्त ०७ को संबलपुर के बस स्टैंड में रात्रि करीब १० बजे दो समूहों के बीच लड़ाई हुई थी। दोनों पक्ष के बीच बस कंपनी के टाइमिंग के आधार पर पुरानी रंजिश थी।

घटना दिनांक के दिन रात्रि में मयंक सोनी के घर उसकी बहन से राखी बंधवाने उसके मित्र श्रीकांत, सुभाष, मनीष चौबे, रामाधार रजक, लक्ष्मण यादव, अतीश चौबे एवं पवन ठाकुर गए हुए थे, जो राखी बंधवाने के पश्चात बस स्टैंड में घूमने गए। सुबह हुई घटना को लेकर आरोपी सुरेश डेहरे व उसके साथी रमेश डेहरे, सूर्या, अवधेश, अवध, संदीप, सुभाष आदि ने रमेश डेहरे के नेतृत्व में मार्शल जीप से आकर विपक्षी समूह पर लाठी व घातक हथियारों से वार कर दिया। पवन ठाकुर व पवन वर्मा को जबरदस्ती पकड़ कर सुरेश डेहरे के वाहन में डाल दिया गया। पवन वर्मा जान बचाकर भाग गया, परंतु जेवरा निवासी पवन ठाकुर उनकी गिरफ्त में रहा जिस पर घातक हथियारों से प्रहार कर उसकी हत्या कर दी गई। प्रकरण में न्यायालय ने धारा ३०२ भादंवि के अंतर्गत सभी आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास, ३००० रुपए अर्थदंड व धारा ३६४ भादंवि में ७-७ वर्ष के कठोर कारावास व ००० रुपए (प्रत्येक को) अर्थदंड व धारा १४७ भादंवि में १-१ वर्ष के कठोर कारावास की सजा व हत्या में प्रयुक्त वाहनों को राजसात करने की सजा दी गई। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक रोहित सिंह ठाकुर ने पैरवी की।

बाघ की खाल का मामला : तीसरे आरोपी का जमानत आवेदन खारिज

छत्‍तीसगढ़ बिलासपुर के तृतीय अपर सत्र न्यायधीश ने बाघ की खाल के मामले में पकड़े गए तीसरे आरोपी रामनारायण साहू उर्फ बंठू के जमानत आवेदन को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने यह फैसला अपराध की गंभीरता को देखते हुए लिया है।

बाघ की खाल मामले में कुछ दिन पहले टिकरापारा निवासी रामनारायण साहू उर्फ बंठू पिता महावीर प्रसाद साहू (४७) को वन विभाग के दल ने घर में दबिश देकर गिरफ्तार किया। इसके बाद इसे भी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से इसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। बीते मंगलवार को शेषन कोर्ट में इसकी जमानत के लिए आवेदन लगाया गया, लेकिन न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आवेदन को खारिज कर दिया।

मालूम हो सरकंडा थाने के पीछे प्रगति विहार बाम्बे आवास में रहने वाला राजमिस्त्री झड़ीराम साहू पिता डेरहाराम साहू (४) अपने घर में बाघ की खाल रखा हुआ था। इसकी खबर मिलने के बाद झड़ीराम के घर दबिश दी गई। टीम ने उसे हिरासत में लिया और घर की तलाशी शुरू कर दी। इस दौरान टीम को उसके घर में झोले के भीतर बाघ की खाल मिली।

इसके बाद टीम के सदस्य खाल को जब्त कर झड़ीराम को पकड़कर जिला कार्यालय लौट आए। झड़ीराम को गिरफ्तार करने के बाद इससे पूछताछ की गई, तब उसने निलेश चौरसिया का नाम भी बताया। इसके बाद टीम ने जाकर निलेश को तालापारा से पकड़ा। इनसे पूछताछ करने पर इन्होंने मामले में रामनारायण के जुड़े होने की जानकारी दी थी। इसी के आधार पर रामनारायण को गिरफ्तार किया गया।

Jun 29, 2010

सुदर्शन शंगारी मामले में जमानत याचिका खारिज

कूट रचना कर दूसरे की करीब ४५ लाख रुपए की संपत्ति को हड़प लेने के एक बहुचर्चित मामले में आरोपी बनाए गए दो सगे भाईयों की जमानत याचिका सोमवार को छत्‍तीसगढ़ के दुर्ग जिला न्यायालय ने खारिज कर दिया। याचिका अष्टम व्यवहार न्यायाधीश ममता बी. शुक्ला के न्यायालय में लगाई गई थी।

प्रकरण के अनुसार २७ अप्रैल २०१० को पद्मनाभपुर निवासी भारत भूषण पिता चमनलाल शंगारी (६१) व सुदर्शन पिता चमनलाल शंगारी (६३) को भिलाई पुलिस ने धारा ३८४, ४०६, ३४ के तहत गिरफ्तार किया गया था। उनके विरुद्ध भिलाई निवासी श्रीमती शुभकर्मा सूद ने थाने में शिकायत की थी कि उनके पति डी.के. सूद की मृत्यु के बाद दोनों ने कूटरचना कर फर्जी मुख्तारनामा तैयार किया और उनकी चिकित्सक बेटी अनिता से कोरे कागज में दस्तखत लेकर उनकी करीब ४५ लाख रुपए की संपत्ति को हड़प लिया। भारत भूषण व सुदर्शन को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया था। इस मामले में पुलिस आज तक चालान पेश नहीं कर पाई है। सोमवार को भारत भूषण के वकील ने इसी का हवाला देते हुए धारा १६७ () के तहत जमानत याचिका लगाई। जिस पर न्यायालय ने तर्क दिया कि दोनों आरोपियों के विरुद्ध पुलिस धारा ४२०, ४६७, ४८६ व ४७१ के तहत भी विवेचना कर रही है। इस तरह प्रकरण में धारा ४६७ व ४६८ जुड़ने की वजह से पुलिस के पास चालान पेश करने के लिए ३० दिन का अतिरिक्त समय बाकी है। अतः जमानत याचिका निरस्त की जाती है।

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