Showing posts with label अमित जोगी. Show all posts
Showing posts with label अमित जोगी. Show all posts

May 4, 2011

सीबीआई ने दी अमित की रिहाई को चुनौती

रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी की रिहाई के खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपील में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। राकांपा नेता श्री जग्गी की रायपुर के मोहदापारा में अप्रैल 2004 की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। विधानसभा चुनाव के समय हुई हत्या को राजनीतिक कारण बताया गया। लंबी जांच-पड़ताल के बाद सीबीआई ने शूटर चिमन सिंह, याहया ढेबर, 5 पुलिस अधिकारियों सहित अमित जोगी को आरोपी करार दिया। सीबीआई ने अमित को जग्गी हत्याकांड का मुख्य आरोपी बताते हुए 31 जुलाई 2005 को गिरफ्तार कर रायपुर के न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। हत्याकांड में 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई के उपरांत सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी.एल. तिड़के ने सुनवाई की। लगातार सुनवाई के उपरांत उन्होंने 31 मई 2007 को हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त अमित जोगी को दोषमुक्त करते हुए रिहा करने का आदेश दिया। वहीं, हत्याकांड के आरोपी शूटर चिमन सिंह, याहया समेत अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई।

कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार व मृतक स्व. जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने पहले से ही हाईकोर्ट में अपील की है। प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है। वहीं, निर्णय आने के चार वर्ष बाद सीबीआई ने निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। 700 पन्नों की अपील में हत्याकांड के मुख्य आरोपी अमित को बरी किए जाने को चुनौती है। अपील फिलहाल रजिस्ट्रार कार्यालय में पेश की गई है।

Jan 20, 2010

छत्तीसगढ जग्गी हत्याकांड : पुनरीक्षण याचिका स्वीकार

छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने आज बहुचर्चित रामअवतार हत्याकांड में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ् दायर सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका विचारार्थ स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी के नाम पांच हजार रूपयों का जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिये ।

न्यायाधीश टी पी शर्मा तथा न्यायाधीश एन के अग्रवाल की खण्डपीठ ने लगभग तीन वर्ष पूर्व दायर इस पुनरीक्षण याचिका पर आज सुनवाई करते हुये अमित जोगी सहित हत्याकांड में सजा पाने वाले सभी 29 अभियुक्तों को नोटिस जारी करने के आदेश दिये हैं ।

उल्लेखनीय है कि चार जून 2003 की रात रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार ने यह मामला केन्द्रीय जांच ब्यूरो ..सीबीआई.. को सौंप दिया था। सीबीआई ने इस मामले में अमित जोगी को हत्या का प्रमुख षडयंत्रकारी मानते हुये गिरफ्तार भी किया था ।


सतीश जग्गी हथियारों की सुरक्षा में
सीबीआई अमित जोगी के साथ ही शूटर चिमन सिंह सहित 31 लोगों के खिलाफ् अदालत में मामला पेश किया था ! रायपुर जिले की विशेष अदालत ने 31 मई 2007 को 29 आरोपियों को सजा सुनाई थी एवं संदेह का लाभ देते अमित जोगी को बरी कर दिया था इनमें 19 को उम्र कैद तथा नौ अभियुक्तों को पांच.पांच वर्ष करावास की सजा दी थी, बाद में इनमें से 24 को जमानत मिल गई थी और पांच अभियुक्त अभी भी जेल में हैं !विशेष अदालत के फ्सैले क खिलाफ् सतीश जग्गी ने उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करते हुये कहा कि अमित जोगी को गलत तरीके से बरी किया गया हत्याकांड के सह अभियुक्तों को सजा दी गई पर पता नहीं किस आधार पर प्रमुख अभियुक्त अमित जोगी को रिहा कर दिया गया ।

याचिका में कहा गया कि राजनीतिक बदला लेने के लिये तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र ने शूटर चिमन सिंह को बुलाकर उनके पिता की हत्या करवाई थी, बाद में फर्जी मुजरिम पकड कर मामला बनाया गया ! सीबीआई ने अपनी जांच में अमित जोगी को मुख्य षडयंत्रकर्ता बताया था ।

याचिका में मुख्य षडयंत्रकर्ता अमित जोगी को छोडे जाने को गलत ठहराते हुये उसे भी सजा देने की मांग की गई, साथ ही दूसरे अभियुक्तों को दी गई सजा नाकाफी बताते उनकी सजा बढाने की मांग की गई ।

देशबंधु से साभार

खबर है कि मामले के सभी आरोपियों ने भी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। इनमें से तीनों मुख्य आरोपियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उनकी अपील पर भी सुप्रीम कोर्ट ने जल्दी सुनवाई करने के निर्देश हाईकोर्ट को दिए थे।

My Blog List