Aug 28, 2009

सीनियर एड्वोकेट्स जूनियरों को गुजारे लायक पैसा अवश्‍य दें

छत्‍तीसगढ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जूनियर वकीलों की हालत सुधारने की दिशा में पहल की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नाम पत्र लिखकर कहा है कि वे अपने जूनियरों को इतनी फीस दें कि ताकि उनको जीवन निर्वाह में कोई कठिनाई न हो।

हाईकोर्ट में जूनियर वकीलों को आमतौर पर काफी संघर्ष करना पड़ता है। अधिकतर कनिष्ठ वकील किसी न किसी सीनियर वकील के अंडर में प्रेक्टिस शुरू करते हैं। इसके पीछे वजह है कि नए वकीलों को हाईकोर्ट में काम करने का न अनुभव होता और न ही उनकी पहचान होती है।

सीनियर के अंडर में रहकर जहां वह कोर्ट में एपीयर होने के तरीके सीखते हैं, वहीं उन्हें याचिका तैयार करने व प्रस्तुत करने की ट्रेनिंग भी मिलती है। इसका फायदा सीनियर एडवोकेट उठाते हैं और कई बार अच्छा काम करने के बाद भी जूनियर को उस अनुपात में मेहनताना नहीं मिल पाता।

इसे ख्याल में रखते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वी.जी .तामस्कर ने एक सरकुलर जारी किया है। इसमें सभी सीनियर एडवोकेट को अपने जूनियर्स का ख्याल रखने की नसीहत दी गई है।

हाईकोर्ट के सभी वरिष्ठ और वरिष्ठतम वकीलों से निवेदन है कि वे अपने अधीन काम करने वाले जूनियर्स को इतनी फीस दें कि वे कम से कम अपने जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी कर सकें।

Aug 27, 2009

रसूखदारों ने किया जमीन फर्जीवाड़ा

फर्जी तरीके से खाता अलग कर जमीन की बिक्री व रजिस्ट्री करने के मामले में दुर्ग, छत्‍तीसगढ़ के कोतवाली पुलिस ने भूमि स्वामी गौतमचंद जैन की रिपोर्ट पर स्‍टील ट्विन सिटी भिलाई-दुर्ग शहर के 5 रसूखदार लोगों के खिलाफ धारा 420, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया है। आरोपियों में महेश कालोनी निवासी सुरेंद्र राठी,भोईपारा निवासी मदन जैन, संतराबाड़ी निवासी कुलदीप सिंह, मठपारा निवासी गोपाल यादव व सुरेश पारख शामिल हैं।

मामले की शिकायत गौतमचंद जैन ने अपने वकील नीरज चौबे के साथ जाकर थाने में की। एफआईआर टीआई आदित्य शर्मा ने दर्ज की। पुलिस के मुताबिक स्टेशन रोड पोलसायपारा में खसरा नं. 1131 व 1137 में जुमला 0.27 डिसमिल जमीन गौतमचंद पारख, जयंतीलाल पारख, शिखरचंद पारख, कुसुमबाई पारख व फुल्लू बाई पारख के सम्मिलित नाम पर बतौर भूमि स्वामी दर्ज था।

इस सम्मिलित भूमि को सह भूमि स्वामियों का नाम पृथक करने के लिए आरोपियों द्वारा एक फरवरी 2002 को प्रार्थी गौतमचंद की जानकारी के बिना उनके फर्जी हस्ताक्षर से आवेदन पत्र तहसील कार्यालय में पेश किया गया। इस फर्जी हस्ताक्षर वाले आवेदन पर तहसीलदार दुर्ग द्वारा 6 मार्च 2000 को 5 पृथक-पृथक हिस्से में बंटवारा का आदेश पारित किया गया। पुलिस ने बताया कि गौतमचंद पारख बनकर कोई अन्य व्यक्ति एक मार्च 2000 को तहसीलदार के समक्ष उपस्थित होकर शपथ पूर्वक कथन दे दिया।

इस शपथ पूर्वक कथन व न्यायालय के आदेश पर गौतमचंद पारख के नाम पर शपथ करने वाले ने फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिया। इस तरह तहसीलदार के न्यायालय की पूरी कार्रवाई फर्जी तौर पर की गई। क्योंकि प्रार्थी ने खाता पृथक करने के लिए कोई आवेदन पत्र ही नहीं दिया था। तहसीलदार के बंटवारा आदेश के अनुसार भूमि खसरा नं. 1131, रकबा 0.020 हेक्टेयर अकेले प्रार्थी गौतमचंद के नाम दर्ज होकर व खसरा नं. 1137 शेष 4 हिस्सेदारों के नाम से 4 टुकड़ों में विभाजित हो गया। पुलिस के मुताबिक फर्जी तरीके से बंटवारा आदेश करवाने में सफल होने के बाद आरोपियों ने जमीन की बिक्री कर उसका पंजीयन भी करवा लिया।

रजिस्ट्री 20 मार्च 06 को की गई। रजिस्ट्री के समय गौतमचंद पारख के स्थान पर अन्य व्यक्ति सुरेश पारख का फोटो लगाया गया है। शिकायतकर्ता की रिपोर्ट के अनुसार जमीन के क्रेतागण सुरेंद्र राठी, मदन जैन विक्रय पत्र के साक्षी कुलदीप सिंह व गोपाल यादव के साथ षड़यंत्र में सुरेश पारख भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी प्रार्थी गौतमचंद पारख से परिचित है। उन्हें जानते, पहचानते हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने षड़यंत्रपूर्वक फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर शामिलात खाते की भूमि को हड़प लिया है। प्रार्थी गौतमचंद ने एफआईआर दर्ज करवाने के साथ फर्जी रजिस्ट्री बयनामा की प्रति, तहसीलदार के समक्ष पेश आवेदन पत्र, बयान व आदेश की छायाप्रति भी पुलिस को सौंप दिया है।

इस पोस्‍ट लिखे जाने तक दुर्ग जिला न्‍यायालय नें आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दिया है.

Aug 24, 2009

जिला अधिवक्‍ता संघ, दुर्ग का मासिक बुलेटिन 'अभिभाषक वाणी' पुन: आरंभ

वर्ष 2 # अंक 1 # अगस्‍त 2009

हौसले बुलंद है-रमा गुप्ता  अधिवक्ता
उच्चतम न्यायालय द्वारा आंध्रप्रदेश सरकार पर एक लाख का जुर्माना
संपादकीय
सचिव की कलम से
राम चरित मानस और भारतीय विधि समतुल्यता
प्रथम महिला सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय का सम्मान
भारत स्वाभिमान न्यायविद संगठन शिविर
शीघ्र सस्ता और सुलभ न्याय मात्र कल्पना
निम्न अदालतों को सीमा में रहने की हिदायत
अंतर्जातीय विवाह एवं भारतीय संविधान
छत्तीसगढ़ का गौरव अधिवक्ता आनंद कुमार तिवारी
लंदन में भारतीय झंडा फहराया गया
वर्तमान परिवेश में स्वतंत्रता का मूल्यांकन
व्यंग्य : वकील साहब
अध्‍यक्षीय उद्बोधन
अधिवक्‍ता श्रीमति मधु पाण्‍डेय पुरस्‍कृत

Aug 23, 2009

दो बीएसपी अफसरों पर 1 लाख का जुर्माना

भिलाई स्‍टील प्‍लांट में हुई एक दुर्घटना में मैनेजर के पद पर कार्यरत मैथ्यू जार्ज की मौत के मामले में श्रम न्यायालय में फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने इस दुर्घटना के लिए बीएसपी के तत्कालीन ईडी (वर्क्‍स) सूर्यभान सिंह व जीएम एससी खन्ना को दोषी पाया। श्रम न्यायालय के न्यायाधीश शशि सोनी ने दोनों अधिकारियों को एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। यह घटना करीब 6 साल पुरानी है। बीएसपी के फोरहैंडलिंग प्लांट में 10 सितंबर 2003 को कार्य के दौरान मैथ्यू जार्ज दुर्घटना के शिकार हो गए।

प्रकरण के मुताबिक वे 17 मीटर नीचे गिर गए। नीचे लेवल पर कन्वेयर बेल्ट में फंसने से उनकी मौत हो गई। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के तत्कालीन उपसंचालक केके द्विवेदी ने इस घटना की जांच की। जांच में उन्होंने प्रकरण में कारखाना अधिनियम का उल्लंघन पाया। जांच के बाद कारखाना अधिनियम के उल्लंघनों के लिए प्रकरण श्रम न्यायालय में दायर किया। न्यायालय ने दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। दोनों अधिकारियों की ओर से न्यायालय में सफाई दी गई कि मैथ्यू जार्ज मैनेजर थे। उन्हें सुरक्षा के बारे में जानकारी थी। याचिकाकर्ता उपसंचालक की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने से अधिकारी या कर्मचारी कोई भी दुर्घटना का शिकार हो सकता है।

सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि कार्य स्थल पर सुरक्षा की कमियों के कारण मैथ्यू जार्ज दुर्घटना के शिकार हुए। न्यायालय ने प्रकरण के आरोपी ईडी वर्क्‍स सूर्यभान सिंह व जीएम एससी खन्ना को दुर्घटना में कारखाना अधिनियम के उल्लंघन का दोषी पाया। दोनों अधिकारियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।

प्राचार्य परीक्षा रद्द, हाईकोर्ट ने दिए आदेश

छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्य परीक्षा को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस आशय के आदेश पिछले दिनों जारी किए गए। 8 जनवरी 2006 को संपन्न परीक्षा व सितम्बर 2008 में साक्षात्कार सहित पूरी प्राचार्य परीक्षा प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने 20 अगस्‍त 2009 को निरस्त कर दिया है। न्‍यालय ने याचिका क्र. 1528, याचिका क्र. 1519, 2724, 5415, 5318, 4778, 5198 की सुनवाई 30 जुलाई को पूरी हो गई थी तथा सुनवाई के पश्चात निर्णय सुरक्षित रखा गया था। धीरेन्द्र मिश्र व चंद्राकर की डबल बेंच ने लोकसेवा आयोग की हायर सेकण्ड्री स्कूलों की प्राचार्य परीक्षा निरस्त करने का फैसल किया है। विदित हो कि लोकसेवा आयोग द्वारा 2005 में प्राचार्य के 46 पदों हेतु विज्ञापन जारी किया गया था जिसके लिए 7706 शिक्षाकर्मियोंशिक्षकव्याख्याताओं ने आवेदन किया था, इन आवेदनों के परीक्षण के बाद 8 जनवरी 2006 को परीक्षा आयोजित किया गया एवं मार्च 2006 को लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया गया। परिणाम जारी करने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मियों के चयन होने के बाद व्याख्याताशिक्षकों ने हाईकोर्ट में यचिका दायर कर शिक्षा कर्मियों को प्रक्रिया से अलग करने की मांग करते हुए याचिकाएं लगाई थी जिसका निवारण करते हुए न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया ही निरस्त कर दी है।

90 शिक्षा कर्मियों ने दिया था साक्षात्कार

26 सितम्बर से 29 सितम्बर 2008 तक हुए साक्षात्कार में 90 शिक्षाकर्मियों ने साक्षात्कार दिया था। उक्त जानकारी आयोग के वकील मनीन्द्र श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में दी थी। छग लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष बीएल ठाकुर सहित आयोग के सदस्यों द्वारा लिया गया पहला साक्षात्कार था। सितम्बर 2008 के कुछ दिन पूर्व ही इन सदस्यों, अध्यक्ष की नियुक्तियां की गई थी अत: आयोग की गरिमा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

Aug 22, 2009

राज्य का फोरेंसिक साइंस लैब भर्ती नियम अवैध

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2006 में बनाए गए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी गजेटेड सर्विस भर्ती नियम को हाईकोर्ट ने अवैधानिक ठहराया है। जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा व आरएन चंद्राकर की डिवीजन बेंच ने आदेश में कहा है कि राज्य शासन ने प्रक्रिया का पालन किए बिना ही नियम बना दिया, जो गलत है।

मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 1993 में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी गजेटेड सर्विस भर्ती नियम बनाया। इस नियम के अनुसार ही क्राइम ब्रांच में फोरेंसिक व साइंटिफिक आफिसरों की भर्ती की जाती थी। मध्यप्रदेश शासन द्वारा तय नियमों के अनुसार सभी वरिष्ठ पात्र साइंटिफिक अफसर (एसएसओ), जिन्होंने पांच साल तक इस पद पर काम कर लिया उनको विभाग में संयुक्त संचालक (जेडी) के पद पर प्रमोशन के योग्य माना जाएगा। छत्तीसगढ़ बनने के बाद राज्य शासन ने वर्ष 2006 में इस विभाग में भर्ती के लिए अलग सेवा नियम बनाया।

इसके तहत राज्य शासन ने फोरेंसिक लेबोरेटरी में होने वाली भर्ती व प्रमोशन नियमों में परिवर्तन कर दिया। परिवर्तित नियम के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन ने तय किया कि सभी साइंटिफिक आफिसर (एसओ) और सीनियर साइंटिफिक आफिसर (एसएसओ) को ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर प्रमोशन का पात्र माना जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय फोरेंसिक लैब में तीन साल काम का अनुभव होना जरूरी है। इस नियम के अनुसार राज्य शासन ने सीन आफ क्राइम विभाग के फोरेंसिक लैब में कार्यरत सीनियर साइंटिफिक आफिसर को इसके योग्य नहीं माना।

इसके खिलाफ दुर्ग में सीनियर साइंटिफिक आफिसर के पद पर कार्यरत बी.पी. मैथिल ने हमारे मित्र वकील अमियकांत तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा तय भर्ती नियम को चुनौती दी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद राज्य शासन द्वारा बनाए गए छत्तीसगढ़ राज्य फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी गजेटेड सर्विस रिक्रूटमेंट रूल 2006 को अवैध ठहरा दिया।

केंद्र सरकार की अनुमति के बिना बनाया नियम

याचिकाकर्ता ने राज्य शासन द्वारा नियम बनाने की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। इसके अनुसार नया नियम समान काम करने वालों के बीच भेदभाव करता है। नए नियम से सीनियर अफसरों का प्रमोशन प्रभावित हो रहा था। सबसे महत्वपूर्ण यह था कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत कोई नया नियम बनाने या पुराने नियम में परिवर्तन के पहले छत्तीसगढ़ शासन को केंद्र सरकार से अनुमति लेनी थी, जो इस मामले में नहीं ली गई।

Aug 20, 2009

छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट की हलचलें

हत्यारे की सजा यथावत
जशपुर जिले के ग्राम गोरिया निवासी भुलेश्वर उर्फ पण्डरा ने 29 दिसम्बर 1996 को ग्राम के ही श्रीधर राम पर टंगिया से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। घटना की रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 302 के तहत अपराध कायम कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायालय रायगढ़ ने दोष सिद्ध होने पर हत्यारे को आजीवन कारावास एवं 100 रूपए के अर्थदण्ड से दंडित किया था। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद हत्यारे की सजा को यथावत रखा है।
घटिया ट्रांसफार्मर आपूर्ति मामले में फैसला सुरक्षित
हाईकोर्ट ने घटिया ट्रांसफार्मर आपूर्ति मामले पर बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सूत्रों के अनुसार शासन ने आर.पी.एस.,सोमानी व आर्या सहित पांच कंपनियों को प्रदेश में ट्रांसफार्मर आपूर्ति के लिए जनवरी 2009 में ठेका दिया था। जांच के लिए 4 सदस्यीय इंजीनियरों की टीम गठित की गई थी। जांच में टीम ने ट्रांसफार्मरों को घटिया स्तर का पाया । इस पर शासन ने पांचों कम्पनियों को टेण्डर से बाहर कर दिया। इसके खिलाफ कम्पनियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
भूमि हस्तांतरण के लिए अनुमति जरूरी
भू-राजस्व संहिता की धारा 170(ख) से संबंधित पुराने मामलों पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस एनके अग्रवाल ने अनेक ऐसे मामलों को खारिज कर दिया है जिसमें आदिवासियों से आदिवासियों के बीच हुए भूमि हस्तांतरण पर अनुमति नहीं ली गई थी। भू-राजस्व संहिता की धारा 170(ख) से संबंधित लगभग 400 पुराने मामलों पर सुनवाई शुरू करते हुए जस्टिस एनके अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा भाईजी विरुद्ध एसडीओ प्रकरण में दिए गए दिशा निर्देश के अनुपालन में इस तरह का फैसला दिया। वर्तमान में हाईकोर्ट में लगभग 40 से 50 ऐसे मामलों की प्रतिदिन सुनवाई हो रही है।

Aug 18, 2009

अदालत पहुंचे एनटीपीसी के शेयरधारक

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी एनटीपीसी के कुछ शेयरधारकों ने रिलायंस गैस मामले में आज दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। अदालत से आग्रह किया गया है कि एनटीपीसी प्रबंधन को निर्देश दिए जाएं कि वह सुनिश्चित कराए कि रिलायंस इंडस्ट्रीज से अनुबंधित कीमत पर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पाने के लिए सभी कानूनी कदम उठाए गए हैं। यह याचिका शेयरधारकों की ओर से अधिवक्ता आर.एन. रामालिंगम ने दायर की।
रामालिंगम ने अदालत से यह भी मांग की है कि वह मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी के बीच कृष्णा-गोदावरी बेसिन से 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से 1.20 करोड़ यूनिट गैस की आपूर्ति के लिए हुए अनुबंध की जांच के आदेश दे। याचिका में कहा गया है एनटीपीसी और उसके अधिकारी सार्वजनिक हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। वे इस तरीके से काम कर रहे हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को सरकारी खजाने की कीमत पर 25,000 करोड़ रूपए का गलत लाभ होगा।
यह याचिका ऎसे समय में दायर की गई है, जब सरकार ने एनटीपीसी को सलाह दी है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज से गैस सुनिश्चित कराने के लिए वह सर्वोच्च न्यायालय जाए। बंबई उच्च न्यायालय में पहले से इस मामले में सुनवाई चल रही है। सरकार के दो कानून अधिकारी, महान्यायवादी गूलम ई.वाहनवती और महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम, कंपनी को पहले ही सलाह दे चुके हैं कि गैस विवाद में कंपनी का हित सुनिश्चित कराने के लिए वह तत्काल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।
पत्रिका से साभार

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