Jul 27, 2009

कनक तिवारी जी का मुख्यमंत्री के नाम खुला खत

मुख्यमंत्री जी, राज्य के पुलिस प्रमुख और अन्य प्रशासकीय तथा राजनीतिज्ञ सलाहकारों से सहमत होते हुए बुध्दिजीवियों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को लगभग उलाहने के स्वर में आपने यही बार बार आव्हान किया है कि वे राज्य सरकार की आलोचना करने के बदले नक्सलियों के खिलाफ क्यों नहीं लिखते। आपकी 'रियाया' होने के कारण मैंने इस सलाह पर अमल किया है और समाचार पत्र इसके प्रमाण हैं। यह अलग बात है कि नक्सली हिंसा के बरक्स राज्य की हिंसा एक बड़ा खतरनाक प्रयोग है जो आज़ादी के बाद से ही भारत की चिंता का विशय रहा है। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद नासूर की तरह फैल गया है। वह मलेरिया के बुखार की तरह आए दिन मनुष्यता को ही आगे पढें .....

Jul 23, 2009

छत्‍तीसगढ उच्‍च न्‍यायालय के वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता श्री कनक तिवारी जी के विचार : विकास की समझ की संवैधानिकता

छत्‍तीसगढ उच्‍च न्‍यायालय के वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता, विचारक, प्रखर वक्‍ता 
श्री कनक तिवारी जी के विचार : विकास की समझ की संवैधानिकता 
पढें और उनके सारगर्भित लेख पर अपने विचार देवें.


लिंक है - विकास की समझ की संवैधानिकता

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